Tuesday, October 31, 2017

गांधीजी की हत्या का मामला दोबारा खोलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तुषार गांधी

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने गांधीजी की हत्या के मामले की दोबारा जांच का विरोध किया है। सोमवार को वे वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। याचिका में कहा, हम 70 साल पुराने
इस मामले को दोबारा खोलने का विरोध करते हैं। तुषार ने याचिकाकर्ता पंकज फडनीस के याचिका दायर करने के अधिकार पर भी सवाल उठाए। इसके बाद कोर्ट ने तुषार से पूछा कि वे किस हैसियत से इस मामले में दाखिल हो रहे हैं। इस पर तुषार की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अगर कोर्ट इस मामले में सुनवाई करते हुए नोटिस जारी करता है तो स्थिति स्पष्ट कर देंगे। लेकिन तुषार गांधी ने ट्विटर पर ही सुप्रीम कोर्ट को जवाब दे दिया। उन्होंने लिखा,'बापू के हत्यारों ने हत्या की परिस्थितियों को झुठलाने के लिए एक अभियान चलाया है। यह उनके हाथों में लगे खून को धोने का निराशाजनक प्रयास है।' इसके बाद उन्होंने अपना पूरा नाम लिखते हुए ट्वीट किया और बताया कि मामले में यह मेरी स्थिति है। 
दरअसल, मुंबई में अभिनव भारत के ट्रस्टी और शोधकर्ता पंकज फडनीस ने गांधीजी की हत्या के मामले की दोबारा जांच की मांग की है। उन्होंने गांधीजी की मौत को इतिहास का सबसे बड़ा कवरअप बताया है। उन्होंने कहा है, 'गांधीजी की हत्या में तीन लोग शामिल थे और नाथूराम गोडसे सहित सिर्फ दो लोगों को मौत की सजा मिली। सजा 15 नवंबर 1949 को दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया, इसलिए मामले को इस कोर्ट ने नहीं देखा।' कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र शरण को न्यायमित्र नियुक्त किया था। शरण ने राष्ट्रीय अभिलेखागार से जरूरी दस्तावेज मिलने का हवाला देकर कोर्ट से 4 हफ्ते का वक्त मांगा था, जो कोर्ट ने मान लिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कई किंतु-परंतु हैं, लिहाजा कोर्ट अमरेंद्र शरण की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहेगी। 
उर्दू में दर्ज हुई थी एफआईआर: 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में गांधीजी की हत्या हुई थी। इसकी एफआईआर उसी दिन दिल्ली के तुगलक रोड थाने में दर्ज की गई थी। उर्दू में लिखी एफआईआर में पूरी वारदात दर्ज है। ये आज भी थाने के रिकॉर्ड रूम में मौजूद है। मामला दोबारा खुलता है तो ये एफआईआर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। 

तुषार ने ट्विटर पर दिया जवाब: तुषार ने अपनी किताब 'लेट्स किल गांधी' के मुख पृष्ठ की तस्वीर पोस्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा, 'इस मामले में यह मेरा हस्तक्षेप का अधिकार (लोकस स्टैंडी) है।' एक और ट्वीट किया,'मैं तुषार अरुण मणिलाल मोहनदास करमचंद गांधी हूं। ये मेरी स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट कृपया नोट करे।'