साभार: जागरण समाचार
आयकर विभाग ने पनामा पेपर्स लीक मामले में पुख्ता सुबूत मिलने पर दागियों के खिलाफ क्रिमिनल चार्ज लगाते हुए अपनी जांच तेज कर दी है। उसने उन सात भारतीय फर्मो व व्यक्तियों पर नए एंटी ब्लैक मनी एक्ट
के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू की है, जिनके नाम विदेश में अघोषित संपत्ति एवं फंड रखने वालों से संबंधित लीक लिस्ट में दर्ज थे। साथ ही जांच एजेंसी इन दागी धन कुबेरों के विदेश में जमा कुल काला धन का नए सिरे से आंकलन करने में भी जुट गई है। भविष्य में इन पर मनी लांडिंग के तहत भी कार्रवाई होगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग के पास पनामा लीक के भारतीय दागियों के नाम विदेश में अघोषित संपत्ति एवं गैरकानूनी फड जमा होने के पुख्ता सुबूत हैं। इसके बाद ही उनके खिलाफ काला धन (अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति (कराधान) अधिनियम, 2015 के तहत जांच शुरू की गई।
आयकर की इस जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि काला धन कुबेरों की संपत्तियों का ताजा आकलन शुरू हो गया है। जल्द ही सभी सात दागियों के खिलाफ विदेश संपत्तियों की जानकारी नहीं देने के मामले में आपराधिक अभियोजन की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी जाएगी। नए काला धन विरोधी कानून की आपराधिक धाराओं के तहत अघोषित विदेशी संपत्तियों की जांच का यह पहला मामला है। इसमें विदेश में अघोषित संपत्ति एवं अवैध फंड रखने का दोषी होने पर 120 फीसद टैक्स एवं जुर्माने के साथ दस वर्ष तक की कैद का भी प्रावधान है।
मनी लांडिंग में भी कार्रवाई: जानकार सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में उपरोक्त सभी सात दागियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांडिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत भी कार्रवाई शुरू की जाएगी। 2015 के काला धन विरोधी कानून के तहत मनी लांडिंग जांच के भी प्रावधान हैं। हाल ही में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने बताया था कि पनामा पेपर्स लीक मामले में आयकर विभाग ने अभी तक 720 करोड़ के अघोषित आय का पता लगा लिया है। जांच तेजी से चल रही है।
क्या है मामला: पिछले वर्ष वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिीगेटिव जर्नलिस्ट्स (आइसीआइजे) ने पनामा दस्तावेजों को सार्वजनिक किया था। इनमें भारत से जुड़े 426 मामलों में सीबीडीटी ने 147 को कार्रवाई योग्य माना था। आयकर ने सभी मामलों को जांच के बाद 35 में छापा एवं 11 का सर्वे किया।