Monday, November 20, 2017

2954 लोक शिक्षा केंद्रों पर ताले 5100 प्रेरकों का रोजगार छीना; आठ माह का मानदेय और 55 माह का खर्च भी अभी तक नहीं

साभार: जागरण समाचार
हरियाणा में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए शुरू किए गए लोक शिक्षा केंद्रों पर अब ताले लटक गए हैं। प्रदेश के 5100 शिक्षा प्रेरकों को नौकरी से हटाने के बाद ऐसे हालात बने हैं। अब स्थिति यह है कि 2954 लोक शिक्षा केंद्रों
पर कोई पढ़ाई नहीं हो रही और नौकरी से निकाले गए शिक्षा प्रेरक अपनी वापसी तथा बकाया वेतन के लिए धरने पर हैं। प्रदेश का कोई अधिकारी इन शिक्षा प्रेरकों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 
भिवानी में चल रहे शिक्षा प्रेरकों के आंदोलन के कारण उनका रुका हुआ वेतन निर्गत करने का ड्रामा जरूर रचा गया, लेकिन उनके वेतन की यह राशि आज तक शिक्षा प्रेरकों के खाते में नहीं आई है। अगस्त 2012 में साक्षरता प्राधिकरण मिशन अथॉरिटी हरियाणा द्वारा दस उन जिलों में शिक्षा प्रेरकों की नियुक्ति की गई, जहां महिलाओं की साक्षरता दस 50 फीसद से कम थी। मिशन के तहत 2954 गांवों में साक्षरता केंद्र खोले गए एवं शिक्षा प्रेरकों की नियुक्तियां की गई।
प्रत्येक जिले में सरकारी कर्मचारी को मिशन कोऑर्डिनेटर, एक जिला कोऑर्डिनेटर, लेखा सहायक, ब्लॉक में अलग से कोऑर्डिनेटर तथा गांव में दो प्रेरक लगाए गए। इन प्रेरकों का मानदेय दो हजार रुपये मासिक रखा गया। उनके द्वारा संचालित लोक शिक्षा केंद्रों का खर्च प्रतिमाह 2250 रुपये निर्धारित हुआ। कार्यक्रम को चलाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं की समितियां बनाई गई थी। शिक्षा प्रेरकों का दावा है कि उनके मेहनत के चलते राज्य में महिला साक्षरता दर अब बढ़कर 65 फीसद से ऊपर पहुंच गई है। बावजूद इसके सरकार ने 5 जून को बिना किसी नोटिस के बजट न होने का हवाला देकर शिक्षा प्रेरकों की सेवाएं समाप्त कर दी।
शिक्षा प्रेरकों को पिछले आठ माह का मानदेय एवं 55 माह का लोक शिक्षा केद्रों का खर्च अब तक नहीं मिला हैं। अब भी हरियाणा में 35 फीसद महिलाएं निरक्षर हैं, जिन्हें साक्षर बनाने में साक्षर भारत मिशन अहम भूमिका निभा सकता है। प्रेरक अपनी बहाली की मांग को लेकर पिछले डेढ़ माह से भिवानी में धरना दिए बैठे हैं, मगर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।