साभार: जागरण समाचार
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में सितंबर माह की परीक्षा परिणाम ने सरकार को आइना दिखा दिया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का आउट कम लर्निंग लेवल को परखने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया था।
इसके तहत सितंबर माह हुई अर्धवार्षिक परीक्षा परिणाम में तीन विषयों (गणित, विज्ञान व अंग्रेजी ) के आधा पर विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया गया। साथ ही यह भी जांचा गया कि प्रदेश में कौन सा जिला, किस पायदान पर है। इसके लिए सरकार ने नियम बनाया कि 60 फीसद अंक प्राप्त करने वाले स्कूल को सक्षम घोषित करेंगे। मगर जब सर्वे की रिपोर्ट आई तो सभी तथ्य चौंकाने वाले थे।
रिपोर्ट के अनुसार 21 जिलों में से एक भी जिला 60 फीसद के आंकड़े को छू तक नहीं पाया। सरकार को मजबूरी में 59 फीसद अंक प्राप्त करने वाले सोनीपत जिले को टॉप घोषित करना पड़ा, जबकि मेवात 29 फीसद अंक प्राप्त कर सबसे निचले पायदान पर रहा।
इसलिए पड़ी जरूरत: सरकार को सरकारी स्कूलों के बच्चों का लर्निंग लेवल जांचने की इसलिए जरूरत पड़ी क्योंकि जैसे-जैसे बच्चे पास होकर अगली कक्षा में जाते हैं तो उन्हें पिछली कक्षा में सिखाई चीजें याद नहीं रहती और जिस कारण वे फेल हो जाते हैं या अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। इसलिए सरकार ने फैसला लिया था कि विद्यार्थी जिस कक्षा में है उसी में ही उसका लर्निंग लेवल सुधारा जाए।इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तेजी से कदम उठाने शुरु कर दिए हैं। जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने के लिए निर्देश दिए है। ताकि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला विद्यार्थी किसी भी क्षेत्र में पिछड़े न रहे।