Monday, November 20, 2017

कैबिनेट सचिव से एक लाख रुपए कम वेतन मिलता है राष्ट्रपति काे

साभार: भास्कर समाचार
सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद करीब दो साल से राष्ट्रपति आैर उपराष्ट्रपति को टाॅप ब्यूरोक्रेट्स और सेना प्रमुखों से काफी कम वेतन मिल रहा है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के
लिए गृह मंत्रालय ने सालभर पहले प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन अभी तक इसे कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है। अभी राष्ट्रपति काे हर महीने 1.5 लाख, उपराष्ट्रपति काे 1.25 लाख और राज्यपाल काे 1.10 लाख रु. वेतन मिलता है। भत्ते और अन्य सुविधाएं अलग हैं।
केंद्रीय कैबिनेट सेक्रेटरी देश के सबसे बड़े ब्यूरोक्रेट होते हैं। 1 जनवरी 2016 से 7वां वेतन आयोग लागू होने के बाद उनका वेतन 2.5 लाख रु. महीना हो गया। वहीं, केंद्र सरकार में सेक्रेटरी को 2.25 लाख रुपए वेतन मिलता है। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर भी हैं, लेकिन फिलहाल उनका वेतन तीनों सेना प्रमुखों से कम है। सेना प्रमुखों को कैबिनेट सेक्रेटरी के बराबर वेतन मिलता है। प्रस्ताव को मंजूरी देने में हो रही देरी पर भेजे मैसेज का सरकार के प्रवक्ता ने कोई जवाब नहीं दिया। एक अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी के बाद ही यह बिल संसद में पेश किया जाएगा। 
प्रस्तावमंजूर हुआ तो 5 लाख रु. महीना तक हो सकता है राष्ट्रपति का वेतन: प्रस्तावके अनुसार राष्ट्रपति का वेतन 5 लाख, उपराष्ट्रपति का वेतन 3.5 लाख और राज्यपाल का वेतन 3 लाख रुपए प्रतिमाह हो सकता है। इसमें पूर्व राष्ट्रपति, दिवंगत राष्ट्रपति के जीवनसाथी, पूर्व उपराष्ट्रपति, दिवंगत उपराष्ट्रपति के जीवनसाथी और पूर्व राज्यपालों की पेंशन बढ़ाने का भी जिक्र है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों का वेतन पिछली बार 2008 में बढ़ा था।