Tuesday, November 21, 2017

मुगाबे पर महाभियोग की तैयारी: नहीं छोड़ी राष्ट्रपति की कुर्सी, पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया

साभार: जागरण समाचार
हफ्ते भर पहले उठा जिंबाब्वे का राजनीतिक बवंडर शांत होने का नाम नहीं ले रहा। जनता, पार्टी और सेना के साथ छोड़ देने के बावजूद 93 साल के रॉबर्ट मुगाबे राष्ट्रपति की कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। सत्तारूढ़ दल
जानू-पीएफ द्वारा इस्तीफे के लिए दी गई सोमवार दोपहर तक की समय सीमा को मुगाबे ने नहीं माना। उनकी पार्टी अब उन्हें हटाने के लिए महाभियोग लाने की तैयारी कर रही है। इससे पहले रविवार देर रात राष्ट्र के नाम संबोधन में मुगाबे अपने विरोधियों पर जमकर बरसे और उन्होंने पूरे प्रकरण को सत्ता हथियाने की साजिश करार दिया। अफ्रीका महाद्वीप में साम्राज्यवाद विरोधी मुहिम के नायक रॉबर्ट मुगाबे की सत्ता से अप्रिय विदाई की पृष्ठभूमि तैयार हो गई है।
जानू-पीएफ पार्टी के मुख्य सचेतक लोवेमोर माटुक ने बताया है कि मुगाबे को इस्तीफे के लिए दिया वक्त खत्म होते ही महाभियोग के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए सीनेट और नेशनल असेंबली की संयुक्त बैठक होगी। उसमें सांसदों की नौ सदस्यीय कमेटी गठित होगी। 
इसके बाद संसद के दोनों सदन फिर से संयुक्त बैठक करेंगे। उसमें महाभियोग प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव पारित होने के लिए उसे दो तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया 24 घंटे में पूरी हो सकती है।
अफ्रीका का राजनीति पर असर: जिंबाब्वे में मुगाबे के 37 साल के शासन का अंत तय माना जा रहा है लेकिन उसका असर पूरे अफ्रीका महाद्वीप पर पड़ेगा। यूगांडा में विरोध का सामना कर रहे योवेरी मुसेवेनी और कोंगो में जोसेफ कबीला की सत्ता पर जिंबाब्वे के बदलाव का असर पड़ सकता है। क्रांति के जरिये अपने देश को आजाद कराने वाले मुगाबे एक समय अफ्रीका ही नहीं बल्कि पश्चिमी देशों के लिए भी एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे लेकिन सत्ताकाल के हाल के वर्षो में उनकी वह छवि बुरी तरह खराब हुई। बदहाल होती अर्थव्यवस्था और विरोध को कुचलने की प्रवृत्ति ने उन्हें लोगों की नजरों में गिरा दिया। अब अफ्रीका के इस नायक का सत्ता प्रतिष्ठान से सम्मानजनक विदाई का दरवाजा बंद होता प्रतीत हो रहा है। वैसे हालात को संभालने के प्रयास अभी जारी हैं। जांबिया के पूर्व राष्ट्रपति केनेथ कौंडा निजी संबंधों के आधार पर मुगाबे को इस्तीफे के लिए तैयार करने के लिए हरारे पहुंचे हैं लेकिन उनकी सफलता संदिग्ध है।