Thursday, November 16, 2017

जिम्बाब्वे में सेना ने किया तख्तापलट; राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्नी को बनाया बंदी

साभार: जागरण समाचार 
अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में सेना ने बुधवार तड़के सत्ता पर कब्जा कर लिया है। सेना का कहना है कि जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया है। आसपास रहने वाले ‘अपराधियों’ के खिलाफ कार्रवाई के लिए ऐसा किया गया। एक दिन पहले
सेना प्रमुख जनरल कांस्टैंटिनो चिवेंगा ने इस मामले में दखल देने की चेतावनी दी थी। सेना ने कहा कि मुगाबे और उनका परिवार सुरक्षित है। राजधानी हरारे में सैनिक और बख्तरबंद वाहनों को तैनात कर दिया गया है। संसद, अदालतों और सरकारी कार्यालयों के रास्ते बंद कर दिए गए हैं। सेना की कार्रवाई के कुछ ही देर बाद मध्य हरारे में तीन विस्फोट हुए। सरकारी टेलीविजन को सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। सरकारी टीवी से सेना के चीफ ऑफ स्टॉफ लॉजिस्टिक्स मेजर जनरल एसबी मोयो ने कहा कि हम केवल मुगाबे के आसपास के अपराधियों को निशाने पर ले रहे हैं जिन्होंने देश में परेशानी पैदा कर अपराध किए हैं। उन्होंने कहा कि यह सैन्य तख्तापलट नहीं है। हमारा मिशन पूरा होने पर सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद है। सेना की कार्रवाई के बाद से मुगाबे और उनकी पत्नी ग्रेस को नजरबंद कर दिया गया है। हालांकि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा से फोन पर बातचीत की। सरकारी सूत्र ने बताया कि वित्त मंत्री इग्नेशियस चोम्बो को हिरासत में ले लिया गया है। वह मुगाबे की पत्नी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पार्टी जानु-पीएफ के जी-40 गुट के प्रमुख सदस्य हैं। ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद 93 वर्षीय मुगाबे 37 वर्षों से जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति हैं। 
ऐसे हुई सेना से तनातनी: सेना प्रमुख जनरल चिवेंगा ने बर्खास्त उपराष्ट्रपति के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई खत्म करने के लिए दखल देने की सोमवार को चेतावनी दी थी। सेना ने मानागागवा की बर्खास्तगी स्वीकारने से मना कर दिया। इसके बाद मुगाबे की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने उन पर विश्वास जताया और चिवेंगा पर देशद्रोह का आरोप लगाया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: जिम्बाब्वे के विपक्षी दल मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज ने शांतिपूर्ण तरीके से संवैधानिक लोकतंत्र की वापसी की मांग की। उसने उम्मीद जताई कि सेना के हस्तक्षेप से स्थिर, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील राष्ट्र की स्थापना होगी।
भारतीय समुदाय सुरक्षित: हरारे में में भारतीय दूतावास ने कहा है कि जिम्बाब्वे में भारतीय समुदाय सुरक्षित है। दूतावास ने ट्वीट किया है, ‘हरारे में शांति है। दूतावास कर्मचारी, भारतीय समुदाय और प्रवासी सुरक्षित हैं। चिंता करने की कोई बात नहीं है।’ जिम्बाब्वे में 1980 से भारतीय समुदाय के लोगों की उपस्थिति शुरू हो गई थी।