Friday, November 17, 2017

दादूपुर नलवी नहर: डिनोटीफाई के फैसले के 50 दिन बाद भी नहीं जारी हुई अधिसूचना, बढ़ता जा रहा विरोध

साभार: भास्कर समाचार
हरियाणा की सियासत में नया मोड़ लाने वाली दादूपुर नलवी नहर अब किसानों में भी आपस में मनमुटाव पैदा कर रही है। 20 गांवों से अधिग्रहित की गई इस जमीन को 5 गांव वापस मांग रहे हैं। इसके लिए वह बाकायदे
पैसे लेकर सिंचाई विभाग के चक्कर काट रहे हैं। जबकि बाकी गांवों के किसान जमीन नहीं मुआवजा ही चाहते हैं वह, सिंचाई विभाग से अधिसूचना की कॉपी चाहते हैं ताकि कोर्ट में जाकर अदालत की अवमानना की याचिका दायर कर सकें। 27 सितंबर यानी 50 दिन पहले कैबिनेट की मीटिंग में सरकार ने नहर को डिनोटिफाइड करने का फैसला ले लिया। फैसले पर दो धड़ों में बंटे किसान अब सिंचाई विभाग पर भी नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार इस मसले को राजनीतिक बना रही है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारी किसानों से तो पैसे ले पा रहे हैं और ही उन्हें दस्तावेज दे पा रहे हैं। सिंचाई विभाग के एसई एसडी शर्मा का कहना है कैबिनेट ने दादुपर नहर को डिनोटिफाइड करने का फैसला लिया है। अभी तक विभाग के पास सिर्फ ये ही सूचना है। पता लगा है कि दस्तावेज सरकार के लीगल सेल में हैं। सेल से आने के बाद ही वे इस बारे में किसानों को कुछ बता सकते हैं। बिना दस्तावेज लिखित आर्डर के बिना पैसे कैसे ले सकते हैं। 
ये किसान गए पैसे लेकर अधिकारियों के पास: किसानराजेश कांबोज ने बताया कि उनकी तीन एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी। उस समय छह लाख रुपए मिले थे। अब हम डिनोटिफाई होने के बाद सिंचाई विभाग के आॅफिस पैसे लेकर जाते हैं पर कोई जमीन देने को तैयार नहीं है। राजबीर सिंह का कहना है कि उनकी पांच एकड़ जमीन गई थी। उन्हें पौने दो लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिला था। अगर जमीन मिल जाती है तो उनका एक एकड़ एक करोड़ से भी अधिक में बिकेगा। 
इनको दस्तावेज चाहिए कोर्ट में जाने के लिए: धरनेपर बैठे किसान अर्जुन सुढैल, राजेश दहिया कश्मीर सिंह का कहना है कि सरकार के खिलाफ उन्हें कोर्ट में केस डालना है। एडवोकेट ने नोटिफिकेशन के दस्तावेज मांगे हैं। दस्तावेजों के लिए वे एसडीओ से लेकर एसई तक से मिल चुके हैं। हर कोई ये कहता है कि अभी तक कोई दस्तावेज नहीं है। 
दो शिफ्टों में जमीन हुई है अधिग्रहण: 1987में भटौली, तेलीपुरा, भूखड़ी, मधुवाला समेत 5 गांव की 190 एकड़ जमीन एक लाख 70 हजार से दो लाख तक के प्रति एकड़ मुआवजे पर अधिग्रहित हुई। अब यहां कलेक्टर रेट 50 लाख रुपए प्रति एकड़ है। प्राइवेट रेट 1 करोड़ तक है। इसलिए किसान जमीन वापस लेने में अड़े हुए हैं।