साभार: भास्कर समाचार
फिल्म 'पद्मावती' पर बवाल जारी है। करणी सेना ने धमकी दी है कि फिल्म रिलीज की तो शूर्पणखा की तरह अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की नाक काट देंगे। वहीं, मेरठ के एक राजपूत नेता ने फिल्म निर्माता संजय लीला
भंसाली और दीपिका की गर्दन काटकर लाने वाले को पांच करोड़ रु. देने का ऐलान किया है। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने दीपिका का समर्थन करते हुए कहा कि अभिनेत्री या अभिनेताओं पर टिप्पणी उचित नहीं है। पद्मावती के सम्मान की बात करते हैं तो सभी महिलाओं के सम्मान का ध्यान रखना होगा। वहीं, करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र नाथ ने दावा किया कि दाऊद इब्राहिम ने फिल्म की फंडिंग की है। हिंदू वीरांगनाओं को बदनाम करने के लिए दाऊद के इशारे पर आपत्तिजनक दृश्य डाले गए हैं।
अजमेर दरगाह दीवान भी विरोध में: फिल्म के विरोध में अजमेर दरगाह दीवान भी उतर आए हैं। दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली खान ने कहा कि भंसाली का आचरण विवादित लेखक सलमान रुश्दी, तसलीमा नसरीन और तारिक फतह की तरह धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला है। इसमें राजपूत समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत की गई हैं और इसका विरोध जायज है। मुसलमानों को राजपूतों का समर्थन करना चाहिए।
केजरीवाल पर बनी फिल्म 'द इनसिग्निफिकेंट मैन' पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार: डाक्यूमेंट्री फिल्म 'द इनसिग्निफिकेंट मैन' के प्रदर्शन पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इनकार कर दिया। इस संबंधी याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, 'जरूरी नहीं है कि विचारोत्तेजक फिल्में किसी व्यक्ति के नैतिक मापदंडों के अनुरूप हों।' चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अटल है। सामान्य तौर पर इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले में कोई फिल्म या डाॅक्यूमेंट्री सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती। यह फिल्म शुक्रवार को रिलीज हो रही है। याचिका में दावा किया गया है कि यह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जीवन पर बनी है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि फिल्म, नॉवल, किताब, ड्रामा और डाॅक्यूमेंट्री पर किसी भी तरह की रोक का आदेश देने से पूर्व अदालतों को बहुत धीमा होना चाहिए, ताकि कलाकार, लेखक और निर्माता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आनंद ले सकें। सृजनात्मक व्यक्ति को ड्रामा-फिल्म आदि के जरिए कानून के दायरे में अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए। याचिकाकर्ता नचिकेता वाल्हेकर ने दलील दी थी कि डाॅक्यूमेंट्री में केजरीवाल को पब्लिसिटी देने के लिए नवंबर 2013 में उन पर स्याही फेंकने का दृश्य दिखाया गया है। स्याही नचिकेता ने ही फेंकी थी।