साभार: भास्कर समाचार
कहते हैं गुस्से के समय बोलना मतलब बाद में अफसोस करने का एक और कारण तैयार कर लेना। इसलिए अमेरिकी लेखक विलियम आर्थर वार्ड ने कहा है कि अपने गुस्से को समस्या की तरफ मोड़ दीजिए, व्यक्ति की
तरफ नहीं। ताकत समाधान पर लगाइए, बहानों पर नहीं। वैसे गुस्से काे अंग्रेजी में एंगर कहते हैं, यह सभी जानते हैं, लेकिन अमेरिकन राजनीतिज्ञ ऐलनोर रुजवेल्ट ने रोचक शब्दों में बताया है कि एंगर क्या है। उन्होंने कहा है- Anger is one letter short of danger.(एंगर की स्पेलिंग में डेंजर से एक ही अक्षर कम है)। वैसे भी आप किसी का दिमाग या मान्यताएं गुस्से से बदल नहीं सकते। हां, समझाइश से या प्यार से जरूर बदल सकते हैं। अरस्तु ने कहा है कि कोई भी नाराज हो सकता है। यह बहुत आसान भी है। लेकिन सही व्यक्ति से नाराज होना, सही समय पर नाराज होना, सही बात पर नाराज होना, सही मात्रा में नाराज होना, सही कारण से नाराज होना, यह आसान है और ही हर किसी के बस की बात है। असल में गुस्सा लंबा असर छोड़ता है। कई बार यह व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। अपने अतीत के प्रति आप जितना गुस्सा मन में बनाए रखेंगे, उतना ही वर्तमान बिगड़ता जाएगा।
वैसे गुस्से से निपटने का सबसे अच्छा तरीका हैै प्रार्थना। जब गुस्सा आता है तो प्रार्थना आपको शांत करती है। यही बात बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोध में भी पता चली है। रिसर्च में कहा गया है कि जब गुस्सा आता है तो प्रार्थना सबसे ज्यादा प्रभावी, सुरक्षित और अासानी से उपलब्ध उपाय है। प्रार्थना बेचैनी और गुस्से की मनोस्थिति से निकाल सकती है। कुछ शोधों में यह भी पता चला है कि धार्मिक और अन्य मान्यताएं और विश्वास भी इंसान को शांत बनाए रखते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जिन लोगों का ईश्वर में भरोसा होता है वो बीमारी और बेरोजगारी जैसे संकट का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं। वे गुस्से पर भी काबू करने में बेहतर स्थिति में होते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें गुस्सा नहीं आता। लेकिन वे गुस्से पर जल्दी काबू पा लेते हैं।