Sunday, July 16, 2017

महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनेगा राष्ट्रीय तंत्र

महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अपराधों की रोकथाम और ऐसे मामलों पर भविष्य में निगरानी बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक तंत्र विकसित करने की योजना बना रही है। इसके तहत एक
राष्ट्रीय महिला कॉल सेंटर, पोर्टल और गंभीर अपराधों पर नजर रखने के लिए एक ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर बनाने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं, पुलिस को महिला अपराधों के प्रति संवेदनशील बनाने के नजरिए से पुलिस बल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने को भी सरकार गंभीरता से लेगी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। देश में महिलाओं को सशक्त बनाने और विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने के प्रयास के तहत सरकार नई राष्ट्रीय महिला नीति बना रही है। इसके तहत इन प्रस्तावों को रखा गया है। महिला नीति के इस मसौदे को पिछले महीने मंत्रियों के समूह ने मंजूरी प्रदान कर दी है। जल्द ही इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा और केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद नई नीति पुरानी की जगह ले लेगी।  
राष्ट्रीय महिला नीति के इस मसौदे पर बीते कुछ महीनों से मंत्रियों को समूह विचार कर रहा था। अंतिम मसौदे में कई नए प्रस्ताव जोड़े गए हैं। इन्हीं में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर का व्यापक तंत्र बनाने का प्रस्ताव भी है। मसौदे के मुताबिक महिला व बाल कल्याण मंत्रलय और केंद्रीय गृह मंत्रलय के पास इस तंत्र को स्थापित करने और उसके संचालन की जिम्मेदारी होगी। देश में महिलाओं को लेकर जितनी हेल्पलाइन चल रही हैं, उन सभी को इस तंत्र के साथ जोड़ा जाएगा ताकि तुरंत प्रभाव से घटनाओं की जानकारी ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) को मिल सके और केंद्र के स्तर पर कार्रवाई हो सके। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस तंत्र में भी बड़े बदलाव का प्रस्ताव नीति के मसौदे में किया गया है। सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक जिले में कम से कम एक पुलिस स्टेशन ऐसा बनाने का प्रस्ताव है जिसका प्रबंधन पूरी तरह महिला पुलिस कर्मियों के हाथ में हो। महिलाओं की ट्रैफिकिंग पर लगाम कसने के लिए नीति के मसौदे में राज्य और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर ऐसे स्थानों को चिन्हित करने और उन पर निगरानी रखने की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है। नीति में खासतौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि जो इलाके महिलाओं के प्रति अपराध के लिए कुख्यात हैं और जहां ऐसे अपराधों का नियमित इतिहास है, वहां सरकार पुलिस बल में महिलाओं की संख्या बढ़ाएगी ताकि उन स्थानों पर कड़ी नजर रखने की व्यवस्था शुरू की जा सके।
2001 में बनी थी नीतिइससे पहले देश में राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति साल 2001 में बनी थी। लेकिन उसके बाद देश में हुए सामाजिक आर्थिक बदलावों के मद्देनजर बीते एक दशक से नई महिला नीति बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। महिलाओं के सशक्तीकरण और देश के विकास में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप एक नई राष्ट्रीय महिला नीति बनाने का फैसला हुआ।
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: जागरण समाचार 
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