Saturday, July 29, 2017

सत्र के बीच में आकर शिक्षा विभाग की खुली नींद; समय पर किताबें न छापकर देने वाले प्रकाशकों पर करेगा अब कार्रवाई

आधा शिक्षा सत्र बीत जाने के बावजूद जिलों में स्कूली किताबें नहीं पहुंचाने वाले प्रकाशकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने किताबों की उपलब्धता पर सभी जिलों से रिपोर्ट मांग ली है। इस रिपोर्ट
के आधार पर न केवल प्रकाशकों की पेमेंट रोकी जा सकती है, बल्कि उन्हें ब्लैक लिस्टेड भी किया जा सकता है। प्रदेश के कई जिलों के स्कूल किताबों से वंचित हैं। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। मान्यता प्राप्त प्रकाशकों द्वारा किताबें पहले जिला मुख्यालय पर पहुंचाई जाती हैं। वहां से बच्चों की संख्या के अनुसार स्कूलों में किताबों की सप्लाई होती है। किताबें छपवाने से लेकर पहुंचाने तक सारा काम प्रकाशक का होता है। मुख्याध्यापक की रिसीविंग के आधार पर प्रकाशक सरकार से भुगतान हासिल करता है। जिन जिलों में किताबें पहुंची भी हैं, वहां पूरी नहीं हैं। बच्चे बिना किताबों के हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। मास्टर भी मजबूर हैं और अधिकारियों से लगातार संपर्क बना रहे हैं। गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बावजूद स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचना चिंताजनक है। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास का कहना है कि पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता के देरी किस स्तर पर हुई, यह जांच का विषय है। यदि प्रकाशकों की वजह से देरी हुई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। दास ने कहा कि किताबों में देरी से बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ग्रीष्मावकाश से पहले अप्रैल और मई में बच्चों को कैचअॅप प्रोग्राम के तहत उनकी कमजोर कड़ियां ठीक करने पर जोर दिया गया था।
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साभार: जागरण समाचार 
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