Sunday, July 16, 2017

देश के आखिरी गांव में साफ दिखती है चीन की बौखलाहट

चीनी सीमा से बिल्कुल लगा हुआ है कुपुप। सीमा पर होने वाली हर हलचल का पहला गवाह यही गांव बनता है। गांव में घुसते इससे पहले ही नजर आया बाबा हरभजन सिंह का मंदिर। वे लोंगेवाला का युद्ध जीतने वाली 23
पंजाब रेजिमेंट में तैनात थे। सेना की जो भी यूनिट यहां आती है वह इस मंदिर को संचालित करती है। यहां से गुजरने वाले सेना के अफसर जवान उन्हें सैल्यूट देकर ही आगे निकलते हैं। गांव वाले कहते हैं कि बाबा के कारण ही भारत चीन सीमा पर कई सालों से शांति बनी हुई है। लेकिन अभी हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। कंचनजंगा पर्वतमाला के करीब 15 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर चारागाह वाला पठारी इलाका है डोकलाम। पिछले एक माह से भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच तनाव का केंद्र यही जगह है। यहां अभी केवल सेना के जवान और सड़क बनाने वालों को ही जाने की इजाजत है, वो भी कड़ी जांच के बाद। चीन यहां पर सड़क बनाने के मंसूबे पाल रहा है, लेकिन भारतीय सेना इसका जवाब उसी के तरीके से दे रही है। कुपुप से डोकलाम की हवाई दूरी ढाई किमी से भी कम है। यहां से किसी को आगे नहीं जाने दिया जा रहा। 
कुपुप में रहने वाले दावा शेरपा बताते है कि वे कई सालों से यहां रहते हैं। यहां जंगली याक मवेशियों को चराने के लिए अक्सर ही गांव के लोग डोकलाम तक जाते थे। पहले कभी वहां पर चीन की हलचल नहीं देखी। लेकिन एक माह से लगातार चीनी फौज सड़क बनाने के संसाधनों के साथ अपने इलाके में डटी हुई है। इसके बाद सेना के अलावा याक मवेशी चराना तो बंद ही हो गया है। यहां से किसी को आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। ग्रामीणों और सड़क बनाने के काम में लगे कुछ श्रमिकों ने बताया कि दोनों ही देशों की सेनाओं के बीच तनाव बहुत बढ़ा हुआ है। ऐसा लगता है जैसे ये तूफान के आने से पहले की शांति है। हालांकि वे कहते हैं कि ऐसा नहीं लगता कि युद्ध होगा। 
सिलिगुड़ी कॉरिडोर को जद में लेने वाले चीन ने इस प्लान को सफल करने के लिए अपने क्षेत्र में सड़क बना ली। अब अपने क्षेत्र से महज छह या सात किमी दूर डोकलाम, जिसे वो डोकलांग कहकर अपना बताता है, वहां सड़क बनाने की पूरी तैयारी कर संसाधन झोंक दिए। इस बारे में जब सेना के जवान या अफसरों से पूछते हैं तो सुरक्षा कारण बताकर आगे जाने से रोक देते हैं। वहीं दूसरी ओर भारत भी अपनी सीमा क्षेत्र में सड़क सामरिक दृष्टि से बंकर बनाने में जुटा है। यहां से पांच किमी की दूरी पर स्थित ट्राई जंक्शन (भारत, भूटान चीन की सीमाएं मिलती है) की चेक पोस्ट से हर कोई स्कैन हो रहा है। इन दिनों हो रही भारी बारिश के बावजूद दोनों ही देशों की सेनाएं अपने अपने इलाके में आमने सामने हैं। कुपुप से डोकलाम तक सड़क भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हो रही है, तो उसे बीआरओ लोकल श्रमिकों से तुरंत ही ठीक करवा रहा है। 
चीन ने गत 20 जून को भारत सेना के साथ फ्लैग मीटिंग में डोकलाम को अपना इलाका बताते हुए वहां तक सड़क बनाने की जानकारी दी थी। भारत ने तुरंत ही इसका विरोध किया। इससे पहले 16 जून को रोड बनाने वाली पार्टी चीनी सेना के साथ डोकलाम पहुंचने लगी। इस दौरान वहां मौजूद भारतीय सेना ने कड़ा विरोध करते हुए वाहन रोक दिए थे। कुपुप में रहने वाली पसंग लामो कहती हैं कि उनकी रिश्तेदार नियमित रूप से सड़क बनाने के लिए डोकलाम तक जाती है। उस दिन भारतीय फौज ने चीनी वाहनों को रोक दिया था। इसका चीनी सैनिकों ने विरोध किया, लेकिन हमारे जवानों ने वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया। इसके बाद से ही चीन अपने क्षेत्र में काफी ऊंचाई तक सड़क बना रहा है। लेकिन भारत के विरोध के बाद दोबारा डोकलाम की तरफ आने की कोशिश नहीं की। वे बताती हैं कि चीन की सेना का वहां पर जमावड़ा साफ दिखाई देता है। यहां पर सड़क बनाने में जुटे स्थानीय श्रमिकों को पूरी जांच के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा है। उनके इनर लाइन परमिट के अलावा सेना की ओर से भी वेरिफिकेशन कर आगे भेजा रहा है। कहती हैं कि यदि युद्ध होता है तो हमें गांव को खाली कर नीचे की ओर जाना पड़ेगा। जब से डोकलाम में भारतीय सेना ने चीन को पीछे खदेड़ा है, उसकी बौखलाहट इस ट्राई जंक्शन में साफ देखी जा सकती हैं। भारत की हर गतिविधि पर चीन पैनी नजर गड़ाए हुए है।
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साभार: भास्कर समाचार 
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