Friday, June 16, 2017

उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले से लेकर नौकरी पाने तक एक क्लिक पर होंगे सारे प्रमाण पत्र वेरिफाई

देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में डिग्री और अन्य सर्टिफिकेट्स की जांच दाखिले के समय फर्जीवाड़ा हो, छात्र कहीं से भी कभी भी अपने दस्तावेजों की डिजिटल इमेज का प्रिंट निकाल सकें। इसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों
को 16 से 30 जून तक जागरूक किया जाएगा। यूजीसी ने नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी योजना पर जागरूकता शेड्यूल की जानकारी अपलोड की है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। इसमें विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, फाइनेंस ऑफिसर, कंट्रोलर एग्जामिनेशन, नोडल ऑफिसर और टेक्निकल एक्सपर्ट को बुलाया गया है। इसके लिए देश के पांच शहर ( पुणे, चंडीगढ़, गुवाहाटी, भोपाल बेंगलुरू) में यह जागरूकता प्रोग्राम कुछ चुने गए शैक्षणिक संस्थान में होगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय करते हुए शेयर डिपोजिटरी की तर्ज पर राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपोजिटरी (एनएडी) का गठन किया है। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले शिक्षा प्रमाणपत्र, डिग्रियों और अन्य शैक्षणिक पुरस्कारों को डिजिटल आधार पर संग्रहित किया जाएगा। मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय का लक्ष्य इसे चालू वित्त वर्ष 2017-18 तक पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू करना है। जिसका उद्देश्य डिजिटल भारत के सपने को एक आयाम तक पहुंचाना और उसे बढ़ावा देना है। 
एमएचआरडी के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि यह योजना डिग्री प्राप्त करने से लेकर नौकरी के दौरान नियोक्ता के लिए भी उपयोगी है। वह ऑनलाइन ही छात्रों की डिग्रियां जांच सकेंगे। अभी पढ़ाई से लेकर नियुक्ति तक में प्रमाण पत्रों के वेरिफिकेशन में काफी समय लगता है। इसके अलावा एजुकेशन लोन और अन्य बैंकिंग संबंधी दस्तावेजों को भी अपडेट करने में लोगों को आसानी होगी। क्योंकि वह अपने दस्तावेजों का वेरिफिकेशन एक क्लिक पर ऑनलाइन करवा सकेंगे। यूनिवर्सिटीज सभी का डेटा एनएडी के पास सुरक्षित होगा। और छात्रों के पास अपने दस्तावेजों की डिजिटल इमेज उपलब्ध होगी। 
संग्रहित डाटा के लिए संस्थान होगा जिम्मेदार: यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि एनएडी को एनएसडीएल डाटाबेस मैनेजमेंट लिमिटेड (एनडीएमएल) सीडीएसएल वेंचर्स लिमिटेड (सीवीएल) परिचालित कर रही हैं। ये दोनों भारतीय प्रतिभूति एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत डिपोजिटरी की पूरी तरह स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां हैं। इसमें डिजिटल आधार पर संग्रहित डाटा की प्रामाणिकता के लिए वह शैक्षणिक संस्थान जिम्मेदार होगा जो इसे प्रणाली में अपलोड करेगा।
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साभार: भास्कर समाचार 
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