Thursday, June 29, 2017

सूरत में खुला देश का पहला क्राइंग क्लब, जहां जी भर रोइए और तनाव दूर भगाइए

स्वस्थ रहने के लिए लॉफ्टर, म्यूजिक और योग थैरेपी के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन अब क्राइंग (रोना) थैरेपी भी गई है। इसकी शुरुआत हाल ही में सूरत में की गई है। यहां क्राइंग क्लब बनाया गया है। जहां हर रविवार को लोग क्राइंग थैरेपी की क्लास कर रहे हैं। वे रोकर अपने तनाव और
अकेलेपन को दूर करते हैं। लोगों को रुलाने के लिए उन्हें जिंदगी के बुरे पल और दुखद घटनाएं याद दिलाई जाती हैं। साथ ही उन्हें उस बात को याद करने के लिए भी कहा जाता है, जिसे याद कर वे सबसे ज्यादा भावुक हो जाते हैं। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। इसे देश का पहला क्राइंग क्लब बताया जा रहा है। इस क्लब की स्थापना लॉफ्टर थैरेपिस्ट और साइक्लोजिस्ट कमलेश मसालावाला ने की है। पहले दिन 80 लोगों ने क्राइंग थैरेपी ली। कमलेश ने अलग-अलग तरीकों से लोगों को रुलाने की कोशिश की। साइलेंट क्राइंग का भी एक सत्र रखा गया। इसमें लोगों को आंख बंद करके रोने के लिए कहा गया। इसके अलावा क्राइंग क्लास में हर किसी ने जिंदगी की एक बुरी घटना को आपस में साझा किया। हालांकि इसकी कोई फीस नहीं रखी गई है। डॉ. मुकुल चौकसी कहते हैं 'बात 42 साल पहले की है। हमारी गली में एक कुत्ता था। मुझे उससे बहुत लगाव था। मैं उसके साथ खेलता था। एक दिन किसी की शिकायत पर स्थानीय निकाय प्रशासन की टीम ने कुत्ते को जहरीला बिस्किट खिला दिया। इस घटना से मुझे बहुत गम हुआ। यह मेरी जिंदगी का पहला सबसे बुरा एहसास था।' थैरेपी क्लास में डॉ. तृप्ति ने पिता की मौत को याद किया तो उनकी आंखों में आंसू गए। बोलीं 'मैंने जब पिता से जुड़ीं यादों को लोगों से साझा किया तो बाकी लोग भी अपने प्रियजनों को याद कर रोने लगे।' अमित चौकसी कहते हैं 'लड़के छोटे होते हैं तो उन्हें रोने पर चुप करा दिया जाता है, पर लड़की को रोने दिया जाता है। यहां आकर लगा कि क्राइंग क्लब ऐसा स्थान है, जहां स्त्री-पुरुष दोनों अपने दिल के गम को रोकर भुला सकते हैं।' 
क्या है क्राइंग थैरेपी: क्राइंग थैरेपी एक वेंटिलेटर थैरेपी है, इसमें व्यक्ति को रुलाकर उसके शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकाला जाता हैै। इंसान की आंख में आंसू उस वक्त आते हैं, जब वह किसी बात को लेकर ज्यादा भावुक होता है, जैसे दुख, खुशी या फिर ज्यादा हंसने पर। आंसू से आंख को तकलीफ देने वाला पदार्थ निकल जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक रोने से तनाव दूर होता है, ब्लड प्रेशर नॉर्मल और ब्लड सर्कुलेशन सामान्य रहता है। इंसान का भावुक होना जरूरी होता है।
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साभार: भास्कर समाचार 
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