Monday, June 26, 2017

गैरमान्यता वाले स्कूलों पर मेहरबान हुई सरकार, मिलेगी नियमों में ढील

बिना मान्यता के चल रहे निजी स्कूलों पर सरकार मेहरबान हुई है। 2007 से पहले से चल रहे निजी स्कूलों को नियमों में ढील देने के लिए शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए है। इन स्कूलों को 2007 से पहले के चलने को लेकर सबूत के तौर पर कोई पांच प्रमाण देने होंगे। इसके बाद इन्हें एग्जिस्टिंग सूची में डाला जाएगा। जिसमें
स्कूल की भूमि कक्षाओं का साइज आदि की ढील दी जाएगी और भविष्य में मान्यता के लिए आवेदन कर पाएंगे। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। सरकार के इस फैसले से जिले में करीब 150 तो प्रदेश में 2500 निजी स्कूलों को लाभ मिलेगा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इन स्कूल संचालकों से 10 दिन में रिकॉर्ड मांगा है। प्रदेश सरकार ने करीब 8 सालों से बिना मान्यता के चल रहे निजी स्कूलों को मान्यता देने की दिशा में मौजूदा नियमों में ढील देने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत 2007 से पहले से चल रहे निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग को अपना रिकार्ड स्कूल चलाने का प्रमाण देना होगा। इसके लिए डीईओ कार्यालय में अपना रिकार्ड जमा करवाना होगा। रिकार्ड को डीईओ कार्यालय शिक्षा निदेशालय भेजेगा। इसके बाद इन सभी स्कूलों एग्जिस्टिंग की सूची में डाला जाएगा। एग्जिस्टिंग की सूची में आने के बाद इन स्कूलों को भूमि कमरों के आकार आदि को लेकर ढील दी जाएगी। इसके बाद भविष्य में ये स्कूल मान्यता के लिए भी आवेदन कर पाएंगे। 
स्कूल चलाने के रिकाॅर्ड में देने होंगे ये सबूत: संचालक को शिक्षा विभाग को 2007 से पूर्व स्कूल चलाने का प्रमाण देना होगा। रिकार्ड के तौर पर स्कूल का वार्षिक परिणाम, सोसायटी का रिकार्ड, भूमि का पट्टानामा, बिजली या टेलीफोन का बिल समाचार पत्र की कटिंग आदि मुख्य रूप से फाइल बनाकर डीईओ कार्यालय में जमा करवाना होगा।
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साभार: भास्कर समाचार 
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