दो तरह के लोग दुनिया में होते हैं, एक वे जो सोचते हैं, जो कुछ हो रहा है वो उनके हाथ में हैं। दूसरी तरह के लोग वे होते हैं जो यह मानते हैं कि परिस्थितियां हाथ में नहीं है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक टिम जज ने
अपने शोध के अाधार पर कहा है कि जो लोग यह सोचते हैं कि परिस्थितियां उनके हाथ में है, उन्हें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा होता है। वे अपने कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। शोध में पता चला है कि एेसे लोग अपने साथियों से बेहतर काम करते हैं और अन्य के मुकाबले 15 से 150 प्रतिशत तक अधिक सैलरी घर ले जाते हैं। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। टिम के अनुसार इन लोगों की एक खास बात यह होती है कि वे कहीं भी काम कर रहे हों, जब भी कोई मुश्किल परिस्थिति सामने आती है, इसे हल करने का इनका तरीका अलग होता है। मुसीबत के समय होने वाली बेचैनी इनके लिए पीड़ा का काम नहीं करती, बल्कि इनके लिए फ्यूल बन जाती है। दरअसल बेचैनी बहुत जरूरी इमोशन है। हमारे दिमाग की बनावट ऐसी होती है कि जब तक हमें थोड़ी बेचैनी हो तब तक उसे एक्शन लेने में परेशानी होती है। जब थोड़ी बेचैनी होती है तभी प्रदर्शन भी अच्छा होता है।
दरअसल कुछ लोग परिवर्तन के लिए अपने दिमाग को तैयार रखते हैं। ऐसा नहीं है कि परेशानियों में भी उनका प्रदर्शन अच्छा बना रहता है। वे भी असफल होते हैं, लेकिन बदलाव का माइंडसेट इन्हें तेजी से एडजस्ट करने में मदद करता है। परिवर्तन के लिए अपने दिमाग को प्रशिक्षित भी किया जा सकता है। इसका अासान तरीका है, संभावित परिवर्तनों की एक लिस्ट बनाना। इस लिस्ट को बनाने का लक्ष्य यह नहीं है आप संभावित परिवर्तनों की भविष्यवाणी करें। बल्कि इसके जरिए आप यह अनुभव कर सकते हैं कि भविष्य में होने वाले परिवर्तनों के प्रति आप तैयार हैं। इस लिस्ट के साथ यह योजना भी बनती जाएगी कि अगर परिवर्तन हुए तो उस स्थिति में आप क्या करेंगे। इस तरह परिवर्तन के प्रति आप ज्यादा सहज अनुभव करेंगे।
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साभार: भास्कर समाचार
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