Thursday, June 15, 2017

Management: दृढ़ विश्वास के साथ बच्चे बनाते हैं बेहतर समाज

एन. रघुरामन (मैनेजमेंट गुरु)
तमिलनाडु के मदुरै जिले में छोटे गांव थिरुवाथावुर के नज़दीक कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, लेकिन इस छोटे गांव के लोगों की बरसों से एक आदत है, जिसका ये धर्म की तरह पालन करते। वे हर मानसून के पहले गांव के हर
छोटे-बड़े तालाब को साफ करते। इसमें कोई स्थानीय सरकारी तंत्र शामिल नहीं होता। हर परिवार से कम से कम एक सदस्य इसमें काम करने आता। तमिल में इसे कहा जाता- ओरानी कप्पाथी, मतलब तालाबों की रक्षा। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। तब प्राथमिक स्कूल में रहे राजामनिकम इस काम को साल-दर-साल करते रहे। उनके घर के कुंए में पानी का स्तर कभी कम नहीं होता। राजामनिकम बाद की पढ़ाई के लिए बाहर चले गए। जब लौटकर आए तो देखा कि पानी के स्रोतों पर प्रशासन ने हक जता दिया है। सीधा असर यह हुआ कि कई ग्रामीण पानी की किल्लत के बारे में बातें करने लगे हैं। पानी के स्रोतों को साफ रखने के उनके विश्वास ने पानी की छोटी-मोटी दिक्कतों को हल करने में मदद की। 
फिर 2015 में बाढ़ अाई, जिसने तमिलनाडु की राजधानी को तैरते शहर में बदल दिया। इसके बारे में उनके साथियों में खूब चर्चा हुई। उन्होंने महसूस किया कि शहर में जलप्रलय का बड़ा कारण यह है कि आसपास की जल संरचनाएं खत्म हो गई थीं। या तो इनके ऊपर निर्माण हो गया था या इन्हें कृषि भूमि में बदल दिया गया था। फिर जब जोरदार बारिश हुई तो चेन्नई शहर बाढ़ से घिर गया। इस घटना से उनका बचपन का विश्वास और मजबूत हो गया कि हर छोटे और बड़े पानी के स्रोत को जीवित और साफ रखना चाहिए। 
इस विश्वास के साथ जब वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी बने और कलेक्टर नियुक्त हुए तो उन्होंने केरल के एरनाकुलम की गंदी झील को साफ करने का काम किया। यह काम उन्होंने 2016 के मानसून के पहले किया। कुछ लोगों को सफाई के उनके काम पर संशय हुआ। 
जिस जगह वे कलेक्टर थे वहां का उन्होंने शाेध किया तो पता चला कि 1980 में यहां 2300 तालाब थे। धीरे-धीरे इनकी संख्या घटती गई और 2015 में ये 800 ही बचे। आईएएस अधिकारी राजामनिकम के लिए यह समय जिले के तालाबों को फिर से साफ और जीवित करने का था। सफाई में मुख्यरूप से तालाब में से कीचड़ और कचरा निकालना शामिल था, ताकि इसकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई जा सके और पानी को इंसानों के इस्तेमाल के लायक बनाया जा सके। लेकिन जब इस आईएएस अधिकारी और उनकी टीम ने चार-पांच तालाब साफ कर दिए तो उसके बाद स्थानीय लोग भी इनके काम में हाथ बंटाने लगे। देखते ही देखते इस पहल ने सामुदायिक पहल का रूप ले लिया। फिर जब तक उन्होंने वर्षा का जल संग्रहित करने के लिए और तालाब बनाने का फैसला किया उनका तबादला केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के एमडी के पद पर हो गया। सौभाग्य से उनके उत्तराधिकारी केएमवाय सफीरुल्ला ने भी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस साल उन्होंने 50 दिन में 100 तालाबों को साफ करने का लक्ष्य रखा है। और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गांव, एनजीओ, ग्रीन एक्टिविस्ट, स्थानीय लोग, छात्र, एनएसएस के वॉलेंटियर ने भी इसमें हाथ बंटाना शुरू किया है। अब प्रशासन की योजना जिले के तीन सबसे अच्छे रखरखाव वाले तालाबों के लिए एक पुरस्कार स्थापित करने की है। अच्छी बात यह हुई कि अच्छे असर नज़र आने लगे हैं और अब पूरा गांव अपने लिए पानी की समस्या का समाधान करने लगा है। 
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
For getting Job-alerts and Education News, join our Facebook Group “EMPLOYMENT BULLETIN” by clicking HERE. Please like our Facebook Page HARSAMACHAR for other important updates from each and every field.