कई राज्यों में भड़के किसान आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को सस्ती दर पर बैंकों से कर्ज दिलाने की स्कीम को आगे भी जारी रखने का एलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की
बैठक में फैसला हुआ कि समय से लोन चुकाने वालों को सिर्फ चार फीसद ब्याज पर फसली कर्ज दिया जाएगा। बैंक सामान्य तौर पर नौ फीसद ब्याज की दर पर फसली कर्ज देते हैं लेकिन बुधवार को केंद्र के फैसले का मतलब हुआ कि सरकार समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को पांच फीसद सब्सिडी देगी। इस तरह किसानों को सिर्फ चार फीसद का ब्याज ही देना पड़ेगा। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। वैसे स्कीम के तहत सामान्य तौर पर दो फीसद सब्सिडी दी जाएगी। इससे किसानों को फसली कर्ज सात फीसद ब्याज पर मिलेगा। चालू साल में इसके लिए केंद्र सरकार ने 20339 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।
यूं तो केंद्र सरकार सरकार की मंशा कर्ज में सब्सिडी देने के बजाय किसानों को सीधे खाते में सब्सिडी देने की रही है। लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान जिस तरह से किसानों के कर्ज माफी को लेकर देशभर में राजनीति शुरू हुई है उससे माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी दबाव में है। हालांकि पिछले साल भी सरकार ने कैबिनेट में ही ऐसा फैसला लिया था। गौरतलब है कि वर्ष 2007-08 से ही केंद्र सरकार की तरफ से समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने वाली स्कीम चलाई जा रही है। इसके तहत तीन लाख रुपये तक के कृषि लोन के लिए सब्सिडी दी जाती है। पर केंद्र सरकार ने बजट में इसका उल्लेख नहीं किया था।
समय पर कर्ज न चुकाया तो: सब्सिडी केंद्र की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जो किसान समय पर कर्ज नहीं चुकाएंगे उन्हें सिर्फ दो फीसद की ही सब्सिडी मिलेगी। यानी उन्हें सात फीसद का ब्याज चुकाना पड़ेगा। कोल्ड स्टोरेज या सामान्य गोदामों में भंडारण की लागत के लिए जिस कर्ज की दर अभी नौ फीसद है, के लिए भी सरकार ने दो फीसद सब्सिडी देने का एलान किया है। इस तरह के कर्ज की मियाद छह महीने ही होती है और सब्सिडी लेने के बाद किसानों को सात फीसद की दर से ब्याज चुकाना होगा। अगर किसानों के फसल को प्राकृतिक आपदा से नुकसान पहुंचता है तो उन्हें अतिरिक्त राहत देने की भी व्यवस्था की गई है।आधार से जोड़े जाएंगे फसली कर्ज खाते सरकार ने कहा है कि सभी लघुकालिक फसली कर्ज खाते चालू वित्त वर्ष में आधार से जोड़े जाएंगे। फसली कर्ज वितरण का लक्ष्य भी 9 लाख करोड़ से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। किसानों को सब्सिडी युक्त फसली कर्ज सार्वजनिक बैंकों के अलावा निजी बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से दिए जाएंगे।देखना होगा आदत बदलती है या नहींकिसानों को सस्ते कर्ज के इस फैसले का कितना असर होता है इसके लिए काफी इंतजार करना होगा। ध्यान रखने वाली बात है कि हाल के दिनों कई बैंकों ने वित्त मंत्रलय से यह शिकायत की है कि किसानों आंदोलन के बाद कई राज्यों में किसानों ने कर्ज चुकाने बंद कर दिए हैं। दिल्ली मुख्यालय स्थित एक सरकारी बैंक के अधिकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों की कर्ज माफी के बाद उन किसानों को बहुत गलत संदेश गया है जो समय पर कर्ज चुका रहे थे। एक तरह से यह संकेत गया है कि जो कर्ज नहीं चुकाते हैं वे फायदे में रहते हैं। अब देखना है कि किसानों की यह आदत बदलती है या नहीं।
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साभार: जागरण समाचार
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