विजय माल्या ब्रिटिश अदालत में मिली राहत का भले ही जश्न मना रहे हों, लेकिन भारत में उनके खिलाफ जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। आइडीबीआइ से कर्ज लेकर नहीं चुकाने के मामले की मनी लांडिंग के
तहत जांच पूरी करने के बाद माल्या के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। ईडी ने माल्या पर आइडीबीआइ से मिले 860 करोड़ रुपये के कर्ज में से 423 करोड़ रुपये विदेश भेजने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही बैंक अधिकारियों पर किंगफिशर एयरलाइंस के खास्ता आर्थिक हालात के बावजूद इतना बड़ा कर्ज मंजूर करने के लिए आरोपी बनाया गया है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विजय माल्या के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने के बाद ब्रिटेन से उसके प्रत्यर्पण का भारत का केस और मजबूत हो जाएगा। प्रत्यर्पण के नियम के मुताबिक आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होना चाहिए। माल्या के खिलाफ सीबीआइ एक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। लेकिन समय पर उसे ब्रिटिश अदालत में पेश नहीं किया जा सका था। अब विजय माल्या के खिलाफ सीबीआइ और ईडी का आरोपपत्र एक साथ ब्रिटिश अदालत के सामने पेश किया जाएगा। भारत सरकार पहले से ही विजय माल्या के जल्द प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन पर राजनयिक दबाव बना रही है। 57 पन्नों की चार्जशीट और उसके साथ लगभग दो हजार पन्नों के दस्तावेजी सुबूतों के साथ ईडी ने अदालत में यह साबित करने की कोशिश की है कि किस तरह विजय माल्या आइडीबीआइ बैंक के अधिकारियों के साथ मिलीभगत के साथ 860 करोड़ का कर्ज हासिल करने में सफल रहा था। जबकि उस समय कंपनी की माली हालत ठीक नहीं थी और वह अपना पिछला कर्ज चुकाने की भी स्थिति में नहीं था। इसके लिए ईडी ने आइडीबीआइ बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के बयान साथ में संलग्न किए हैं। ईडी ने आरोप लगाया है कि 860 करोड़ का कर्ज लेने के बाद विजय माल्या केवल 53 करोड़ ही चुका पाया और 807 करोड़ का मूलधन भी बकाया रह गया।
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साभार: जागरण समाचार
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