साभार: जागरण समाचार
राजस्थान से सटी बांगर बेल्ट का प्रमुख संसदीय क्षेत्र हिसार। यहां सांसद निधि के खर्च को लेकर बवाल मच गया है। ताऊ देवीलाल के पड़पोते एवं निवर्तमान सांसद दुष्यंत चौटाला ने अपने से पूर्व के तीन सांसदों को
कठघरे में खड़ा किया है। इन सांसदों में पूर्व सीएम स्व. भजनलाल, उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई और पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश जेपी हैं।
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अलाट हुई करीब 25 करोड़ रुपये की सांसद निधि के अलावा तीनों पूर्व सांसदों की बची हुई तीन करोड़ 14 लाख रुपये से अधिक की राशि को भी खर्च किया है। दुष्यंत चौटाला के इस आरोप के बाद कुलदीप बिश्नोई और जयप्रकाश जेपी ने उन पर पलटवार किया है। दोनों ने कहा कि दुष्यंत अब सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में पड़कर अपनी मर्यादा भूल गए हैं और झूठ की राजनीति पर उतर आए हैं।
मेरे से पहले के तीन सांसदों ने की हिसार की उपेक्षा: दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मेरे से पहले हिसार लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व स्व. भजनलाल, कुलदीप बिश्नोई और जयप्रकाश जेपी ने किया। तीनों सांसद अपने कार्यकाल के दौरान सांसद निधि का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर सके और वह धनराशि उनके खातों में बची रह गई। मैं जब हिसार का सांसद बना तो विकास कार्यों के लिए राशि कम पड़ गई। जब मुङो पता चला कि मेरे से पूर्व के सांसदों ने अपने हिस्से की राशि खर्च नहीं की तो मैंने लोकसभा सचिवालय से पत्रचार कर पूर्व सांसदों का रिकार्ड निकलवाया और उनके हिस्से की राशि को री-स्टोर कराकर हिसार की जनता के विकास कार्यों पर खर्च की। मैंने अपने हिस्से के 25 करोड़ अलग से खर्च किए।
खुद तीन करोड़ 56 लाख क्यों नहीं खर्च कर पाए दुष्यंत: कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि शीशे के घर में रहने वालों को दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। दुष्यंत मेरे बेटे भव्य की लोकप्रियता से घबरा गए हैं। दुष्यंत गलत बयानबाजी कर रहे हैं। उनके कार्यकाल की तीन करोड़ 56 लाख रुपये की राशि खर्च नहीं हुई, जो कि वापस चली गई है। उन्हें यह बात याद नहीं आ रही। रही हमारे कार्यकाल की बची हुई राशि के दुष्यंत चौटाला द्वारा खर्च करने की बात, इसमें कोई सच्चाई नहीं है। सांसद के नाते मैंने विकास कार्यों को मंजूरी दी। डीसी आफिस में ग्रांट आई। अधिकारियों ने एस्टीमेट बनाने में देरी की। तब कई राजनीतिक कारण रहे होंगे। पैसा डीसी आफिस में मौजूद था, मगर एस्टीमेंट तैयार करने में लापरवाही बरती गई।
जिस एमपी के कार्यकाल में काम अलाट होगा, उसी को श्रेय: पूर्व सांसद जयप्रकाश ने कहा कि दुष्यंत चौटाला को ज्ञान नहीं है। मेरे कार्यकाल में एक रुपया भी लंबित नहीं था। पांच साल के बाद वैसे भी पैसा किसी सांसद के खाते में नहीं रहता। मेरे बाद दो एमपी आए। दरअसल, जिस एमपी के कार्यकाल में काम अलाट होता है, भले ही उसकी मंजूरी के बाद ग्रांट बाद में अगले एमपी के कार्यकाल में आए, लेकिन काम पुराने वाले एमपी के हिस्से में ही दर्ज होता है। दुष्यंत चौटाला सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में पड़ गए हैं। मुङो अच्छी तरह से याद है कि मेरे कार्यकाल का कोई पैसा लंबित नहीं था। और तो और पैसा कम पड़ गया था।