साभार: जागरण समाचार
नामवर तो बनारस की ‘सुबह’ है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की शाम को यादगार बना दिया। अपने संसदीय क्षेत्र में दूसरी पारी खेलने पहुंचे मोदी केस्वागत में जनसैलाब उमड़ पड़ा। तीन बजे से उनका रोड शो
प्रस्तावित था, लेकिन सवा दो घंटे की देरी से शुरू हुए इस मेगा शो में अब तक के सारे रिकॉर्ड टूट गए। लंका से लाखों निगाहों की छाया से गुजरती हुई विविध रंगों से सजी उनकी यात्र मदनपुरा तक पहुंची तो काशी अभिभूत थी। मोदी पर फिदा थी। मोदी ने भी काशी का दिल जीत लिया। 
वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ेंगीं प्रियंका: कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की अटकलें खत्म हो गई हैं। कांग्रेस ने गुरुवार को वाराणसी से अजय राय को मैदान में उतारने का एलान किया। वह 2014 के आम चुनाव में भी मोदी के सामने मैदान में थे। हालांकि उन्हें तीसरे स्थान के साथ भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। बनारस में 19 मई को अंतिम चरण में मतदान होगा। कांग्रेस ने इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से मधुसूदन तिवारी को मैदान में उतारा है। भाजपा ने यहां से फिल्म अभिनेता रवि किशन को मैदान में उतारा है। वहीं, सपा-बसपा गठबंधन से रामभुआल निषाद मैदान में हैं। इन दोनों ही सीटों से कांग्रेस ने प्रत्याशियों की यह घोषणा उस समय की है जब नामांकन की अंतिम तारीख 29 अप्रैल है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों पर सभी की निगाहें थीं। पार्टी से जुड़े रणनीतिकारों के मुताबिक प्रियंका को वाराणसी से नहीं उतारने का फैसला राहुल और सोनिया गांधी से चर्चा के बाद किया गया है। वैसे भी प्रियंका के अमेठी, रायबरेली सहित देश के कई हिस्सों में व्यस्त होने के चलते पार्टी उन्हें एक जगह पर बांधकर नहीं रखना चाहती। कांग्रेस का मानना है कि उनकी सक्रियता से पार्टी को पूरे देश में लाभ मिलेगा। मालूम हो कि पिछले कई दिनों से प्रियंका के वाराणसी से चुनाव लड़ने की चर्चाएं थीं।
काशी बोले दिल से-मोदी फिर से: मोदी, छत की मुंडेरों से झांक रहीं महिलाओं, बच्चों व बूढ़ों से हाथ हिलाकर अभिवादन करते और अपने ऊपर बरस रही गुलाब की पंखुड़ियों को चेहरे से हटाते। उनकी काले रंग की रेंज रोवर गुलाबी हो गई थी। जहां तक नजर जा रही थी, बस सिर ही सिर नजर आ रहे थे। कोई केसरिया टीशर्ट पहने तो कोई पगड़ी बांधे। किसी के गले में भाजपा का भगवा दुपट़टा तो कहीं रामायण के पात्रों के वेश में रामजी की सेना। विहंगम दृश्य था और मोदी की भावुकता उनके चेहरे पर झलक रही थी। काशी बोले ‘दिल से-मोदी फिर से’, जैसे नारे गूंज रहे थे।
गंगा-जमुनी तहजीब हुई जिंदा: गंगा आरती का समय सात बजे निर्धारित है। हालांकि लोगों से मिल रहे अपनेपन ने उन्हें जन-जन से जोड़ दिया था। सात बजे तक भी मोदी गोदौलिया नहीं पहुंच सके थे। इसलिए, मोदी की यात्र थोड़ी तेज हो गई। अस्सी से भदैनी तक उन पर जमकर फूल बरसे। मदनपुरा में गंगा-जमुनी तहजीब जिंदा हो गई। मोदी की अगवानी में मुस्लिम समाज सबसे आगे था। यह पिछले पांच वषों के विश्वास का नतीजा था। यह समाज अपने एमपी को फिर पीएम बनाने के लिए पूरे उत्साह से आगे आया। मुबारक अली ने कहा यह मोदी के भरोसे की जीत है क्योंकि उन्होंने बिना भेदभाव काम किया। मोदी मदनपुरा पहुंचे तो साढ़े छह बज चुके थे। यह सफर लोगों के उत्साह का गवाह बन गया। मोदी-मोदी के गगनभेदी नारों से काशी गुंजायमान थी। कभी छतों पर देखते हाथ जोड़ते तो कभी दाएं-बाएं लोगों का अभिवादन कुबूल करते और हाथ लहराते। उन पर गुलाबों की पंखुड़िया बरस रही थीं। सबसे दिलचस्प तो यह कि मुसलमान टोपी लगाए और गले में भाजपा का दुपट्टा भी पहने थे।
महानायक को अपने बीच पाकर उभर आया दर्प: मोदी मदनपुरा तक आए तो सड़कें जगमग हो गईं। दुनिया में खास पहचान बना चुके भारत के इस महानायक को अपने बीच पाकर काशी का भी दर्प उभर आया। गोदौलिया में स्वागत की बड़ी तैयारी थी। लोग उत्साह से कह रहे थे कि काशी ने न तो 2014 में और न ही 2017 में यह जलवा देखा। मोदी के कटआउट भी चारों तरफ लहरा रहे थे।