Saturday, April 6, 2019

ACR में बढ़ा-चढ़ाकर दिए नंबर तो सबूत मांगेगी सरकार

साभार: जागरण समाचार 
आइएएस अधिकारी डॉ. अशोक खेमका की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) पर विवाद से सबक ले प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव से लेकर सचिवों और सुपरिंटेंडेंट-डिप्टी सुपरिंटेंडेंट पर शिकंजा कस दिया है।
एसीआर में कोई अधिकारी अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमर्जी से सराहना पत्र की सिफारिश नहीं कर सकेगा। इसके अलावा एसीआर में किसी भी कर्मचारी को अग्रिम वेतन वृद्धि की सिफारिश करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अगर कोई सीनियर अपने मातहत के लिए सराहना पत्र की संस्तुति करता है तो न केवल कारण बताना होगा, बल्कि उस पूरे विशेष काम की विस्तृत रिपोर्ट साथ में नत्थी करनी पड़ेगी जिसका फायदा वह जूनियर अफसर को दिलाना चाहते हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने इस संबंध में लिखित आदेश जारी किए हैं।
एसीआर में कोई भी सक्षम अधिकारी सरकार से अपने पसंदीदा अफसर को अग्रिम वेतन वद्धि की सिफारिश नहीं कर सकेंगे। हालांकि अगर वह जरूरी समङों तो उन्हें अलग से प्रस्ताव भेजने की छूट जरूर दी गई है। एसीआर रिपोर्ट लिखने वाले अधिकारी को हस्ताक्षरों के साथ अपने पदनाम का भी उल्लेख करना होगा। दरअसल हरियाणा में उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा अपने चहते जूनियर अफसरों और कर्मचारियों को मनमर्जी से प्रशंसापत्र और अग्रिम वेतन वृद्धि की सिफारिश कर दी जाती है जिसका कोई ठोस आधार नहीं होता। सरकार के पास इस संबंध में लगातार शिकायतें पहुंचती रही हैं। अपेक्षाकृत सुस्त कर्मचारियों को पारितोषिक से न केवल ईमानदार और कर्मठ कर्मचारियों का मनोबल गिरता है, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने नए सिरे से गाइड लाइन जारी कर दी है।
खेमका की एसीआर पर हो चुका बवाल: 1991 बैच के आइएएस अशोक खेमका की एसीआर को लेकर पिछले दिनों खूब बवाल मचा और मामला हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। वर्ष 2016-17 के लिए भरे एप्रेजल पर मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने उन्हें 10 में से 8.22 नंबर दिए थे जिसे बाद में मंत्री अनिल विज ने केवल अपनी ओर से 9.92 अंक दिए, बल्कि खेमका की योग्यता, सच्चाई, ईमानदारी और बुद्धिमत्ता का कोई सानी नहीं होने की टिप्पणी की। बाद में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खेमका के नंबर घटाते हुए विज की टिप्पणियों को भी अतिश्योक्ति बताया। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर सीएम की टिप्पणी हटानी पड़ी, लेकिन अब ने प्रशंसा पत्र के लिए सिफारिश में अच्छे कामों की रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया है।
हिंदी में चलेगी फाइल, अंग्रेजी मान्य नहीं: हिंदी को प्रमोट करने की कोशिश में लगी सरकार ने सभी अधिकारियों को केवल हंिदूी में ही एसीआर लिखने की हिदायत दी है। अंग्रेजी में लिखी गई टिप्पणी मान्य नहीं होगी। सभी सक्षम अधिकारियों को निर्देश है कि 31 दिसंबर के बाद कार्यालय में मिली 2018-19 की गोपनीय रिपोर्ट को कर्मचारियों की एसीआर की फाइन में न लगाया जाए। निर्धारित समय में एसीआर रिपोर्ट फाइनल कर ऊपर नहीं भेजने वाले अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।