Thursday, July 7, 2016

बदलाव: भाजपा सरकार बदलेगी अप्रैल से मार्च वित्त वर्ष की परिपाटी

भाजपा की एनडीए सरकार अंग्रेजों के जमाने की एक और परंपरा को तोड़ने की तैयारी कर रही है। मोदी सरकार वित्तीय लेखा-जोखा की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हुए अंग्रेजों के जमाने से चल रहे वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) को बदलने की तैयारी कर रही है। ऐसा होने पर एक अप्रैल से अगले वर्ष 31 मार्च तक चलने वाली
वित्त वर्ष की मौजूदा व्यवस्था बदले जाने पर फरवरी में आम बजट पेश करने की परिपाटी भी बदल जाएगी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रलय ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति का गठन कर नए वित्त वर्ष की व्यावहारिकता परखने को कहा है। मंत्रलय की बजट डिवीजन की ओर से बनायी गयी इस समिति में पूर्व कैबिनेट सचिव के एम. चंद्रशेखर, तमिलनाडु के पूर्व वित्त सचिव पीवी राजारमन और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो डा. राजीव कुमार बतौर सदस्य शामिल हैं। मंत्रलय ने इस समिति को इस साल 31 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही समिति इस बात पर विचार करेगी कि नया वित्त वर्ष किस तारीख से शुरू किया जाए। संभावित तारीखों और वित्त वर्ष की मौजूदा तारीख की अच्छाइयों और कमियों दोनों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा समिति मौजूदा वित्त वर्ष की शुरुआत तथा विगत में वित्त वर्ष में बदलाव के लिए हुए प्रयासों का अध्ययन भी करेगी। सूत्रों ने कहा कि समिति केंद्र और राज्य सरकारों की प्राप्तियों और व्यय के सटीक आकलन की दृष्टि से वित्त वर्ष की उपयोगिता, विभिन्न कृषि फसलों के अंतराल, कार्यकारी सत्र (वर्किंग सीजन) और कारोबार पर इसके प्रभावों के बारे में विचार विमर्श करेगी। समिति को कहा गया है कि वह इन सभी विषयों पर विचार करने के बाद देश के लिए उपयुक्त नया वित्त वर्ष शुरू करने की तारीख की सिफारिश कर सकती है। इसके अलावा समिति यह भी बताएगी कि वित्त वर्ष में बदलाव कब से किया जाए और जब तक नया वित्त वर्ष शुरू न हो तब तक कर तथा अन्य मामलों के संबंध में क्या व्यवस्था अपनायी जाए। सूत्रों ने कहा कि पहले एक विकल्प यह भी सुझाया गया था कि वित्त वर्ष अप्रैल में शुरू होने के बजाय मानसून के बाद शुरू होना चाहिए ताकि सड़क सहित विभिन्न योजनाओं के निर्माण कार्य में रुकावट न आए। इसके पीछे विचार यह है कि फिलहाल अप्रैल से नया वित्त वर्ष होता है लेकिन जून से सितंबर तक मानसूनी मौसम होने के कारण देश के विभिन्न भागों में निर्माण कार्य नहीं हो पाते इसलिए महत्वपूर्ण समय ऐसे ही चला जाता है।
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साभारजागरण समाचार 
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