Saturday, March 19, 2016

एसवाईएल मामले में पंजाब नहीं मानेगा सुप्रीम कोर्ट की बात, टकराव की आशंका बढ़ी

सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे पर विधायिका और न्यायपालिका में टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। पंजाब विधानसभा ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से एक और प्रस्ताव पारित कर दिया जिसमें कहा गया है कि ‘किसी भी स्थिति में और किसी भी कीमत पर एसवाईएल नहर को न बनने दें।’ यह प्रस्ताव पास करके मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को भी चुनौती दे डाली है। यह पोस्ट
आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि वह किसी भी सूरत में राज्य से बाहर पानी नहीं जाने देंगे। मुख्यमंत्री शुक्रवार को यह प्रस्ताव तब ले आए जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। विधानसभा में इससे पहले 14 मार्च को द सतलुज यमुना लिंक नहर जमीन (ट्रांसफर प्रोप्रेटरी राइट) बिल 2016 पास हुआ था। इसके तहत किसानों को एसवाईएल के लिए अधिगृहीत की गई जमीन मुफ्त में लौटाई जानी थी। बादल ने शुक्रवार को प्रस्ताव पेश करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘गैर वाजिब फैसला नहीं माना जाएगा।’ साथ ही उन्होंने अपने प्रस्ताव में इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि एसवाईएल नहर बनाने की न कोई जरूरत थी और न ही है। साथ ही उन्होंने सदन को यह भी बताया कि हरियाणा से इस नहर को लेकर 191.75 करोड़ रुपये की जो राशि प्राप्त हुई थी उसे हरियाणा सरकार को वापस कर दिया गया है। बादल ने जोर देकर कहा कि सतलुज-यमुना नहर के निर्माण की आज्ञा देने की जगह वह बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं।
अकाली-भाजपा सरकार ने पंजाब के नदी जल पर राज्य के अधिकार छीनने वाले किसी का कोई भी फैसला न पहले कभी माना है, न अब मानेगी और न ही भविष्य में माना जाएगा। - प्रकाश सिंह बादल, मुख्यमंत्री पंजाब
हम अपने हिस्से का पानी लेकर रहेंगे, चाहे कुछ भी करना पड़े। पंजाब के एसवाईएल बिल पर चुप नहीं बैठे हैं। हम केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से मिले। हम शीघ्र ही हरियाणा के सांसदों व विधायकों के साथ राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मिलेंगे। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा
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साभारजागरण समाचार 
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