Saturday, March 19, 2016

लाइफ मैनेजमेंट: धरती को बचाने के लिए उसे देना भी जरूरी

एन रघुरामन (मैनेजमेंट फंडा)
मैं उस दौर का हूं ,जब धरती को बचाने के लिए अर्थ ऑवर जैसे कार्यक्रमों में कोई हमें बिजली के स्विच ऑफ करने का नहीं कहता था। इसका एक कारण यह भी था कि तब अधिकांश रातें अर्थ ऑवर ही होती थीं। रोज ही लंबी बिजली कटौती होना आम बात थी। उन दिनों दोपहर में स्कूल से घर लौटकर अक्सर देखता कि मां चावल
में से भूसी छान रही होती और चिड़िया फेंके गए दानों को चुनने के लिए उनकी साड़ी के एकदम पास तक जाती।यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। हमारे घर का बरामदा आजकल की बालकनी की तरह सड़क की ओर खुलता था, इसलिए जैसे ही मैं सड़क के कोने से घर की ओर मुड़ता वह मुझे देख लेती। मैं जब घर के दरवाजे पर पहुंचता वह इशारों में मुझसे खामोशी बनाए रखने और धीरे-धीरे पास आने को कहती। वह मुझे दृश्य दिखाती कि कैसे बड़ी चिड़िया छोटे बच्चों को खिला रही है और फिर मां मुझे किचन में ले जाती। मेरे हाथ-पैर धुलवाती और मुझे खाना खिलाती। वैसे ही जैसे चिड़िया अपने परिवार को खिलाती थी। 
जब उनका ध्यान सड़क पर नहीं होता या कभी-कभी जब किताबों और चिड़िया में वह मग्न होती, मैं अपनी चप्पल दरवाजे पर ही फेंक देता और उन्हें गले लगाने के लिए धीरे से दौड़कर उनके पास पहुंच जाता। तब तक सारी चिड़ियाएं उनके पास से उड़ चुकी होती। और वह समझ जाती कि यह उनका शैतान बेटा ही है जो जान-बूझकर ऐसा कर रहा है। वह छोटे पक्षियों के प्रति अच्छा बनने के लिए प्यार से मुझे डपटती और फिर हाथ-पैर धोने और मुझे खिलाने का दौर शुरू होता। उन्हें चिढ़ाने के लिए मैं अपनी यूनिफार्म का शर्ट उतारता और उन छोटी चिड़ियाओं के ऊपर लहराता जो उस समय तक अपने घरों में जा छुपतीं, मेरा मतलब अपने घोंसलों में, जो उन्होंने हमारे घर की लकड़ी की छतों के बीच बना रखे थे। और फिर वो सभी पिछवाड़े की ओर उड़ जातीं। मैं हमेशा सोचता था कि मां पुराने विचारों की हैं, क्योंकि उन्होंने घर में छत का पंखा लाने को इसलिए मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे चिड़ियाओं के साथ दुर्घटना हो सकती थी। वह उन छोटे पक्षियों से इतना प्यार करती थी कि मुझे चिड़ियाओं की कहानी सुनाती जो कुछ यूं थी - 
दूर बहुत दूर एक देश है, जिसका नाम है चीन और उस देश में बहुत सारी चिड़ियाएं थीं। और उस देश के राजा माओ त्से तुंग (पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना के फाउंडिंग फादर) ने तय किया कि देश को चिड़ियाओं से मुक्त करना है, क्योंकि वह बहुत अनाज खा जाती है, इसलिए उसने लोगों को आदेश दिया की सारी चिड़ियाओं को मार डालो। उस बड़े स्पेरो अभियान के दौरान 1958 से 1962 के बीच लाखों चिड़ियाओं को मार दिया गया। लोग तब तक उनका पीछा करते जब तक कि चिड़िया थककर आकाश से नीचे गिर जाए। इस बुरे फैसले का असर भी काफी बुरा रहा। किसी ने उन्हें यह नहीं बताया था कि चिड़िया सिर्फ अन्न ही नहीं कीड़े भी खाती है। चूंकि कीड़ों पर नियंत्रण का कोई उपाय नहीं किया इसलिए उनकी संख्या बहुत अधिक हो गई। 'पेड़ों को छोड़कर जो उड़े उनका जिक्र क्या, पाले हुए भी गैरों की छत पर उतर गए।' वे कीड़े वह अनाज चट करने लगे जो इंसान अपने लिए उगाता था। अचानक लोगों के लिए भोजन की कमी होने लगी और करीब 4.50 करोड़ लोग भोजन की कमी के कारण मर गए। 
इस कहानी ने मेरे मन में उन पक्षियों के लिए बहुत सम्मान पैदा किया और उसके बाद से अपने घर में चिड़ियाओं को अनाज और कीड़े खाते देख मुझे बहुत खुशी होती। मेरी मां के पास ऐसी कहानियां होतीं, जिनमें सच्चे पात्र, तथ्य और बड़े उदाहरण होते। उन दिनों हमें अर्थ ऑवर की जरूरत नहीं होती थी। वह पीढ़ी धरती को और हर पक्षी को वह सभी चीजें लौटाती थी जो संभव होता था। लेने और देने का यह क्रम हर व्यक्ति के स्तर पर चलता था। 
फंडा यह है कि इस धरती को कुछ नहीं होगा अगर हम सभी यह जान लें कि धरती से क्या लेना है और क्या उसे वापस करना है। 

Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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