Monday, May 8, 2017

छुट्टियों में किताबों से बाहर निकल कर ऐसे तराशें अपने हुनर को

अरुण श्रीवास्तव 
दो साल पहले इन्हीं गर्मियों की बात है। बीटेक ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग कर रहे समर तीसरे साल में छठे सेमेस्टर का एग्जाम देने के बाद अपने कुछ दोस्तों के साथ दिल्ली जाकर कैड (कंप्यूटर एडेड डिजाइन) कोर्स
करने की सोच रहे थे। ऐसा सोचते हुए उनके दिमाग में यही था कि शायद यह कोर्स कर लेने से उन्हें आगे जल्दी जॉब पाने में मदद मिल सकेगी। उन्हीं दिनों एक वरिष्ठ काउंसलर ने उन्हें सलाह दी कि जल्दी जॉब हासिल करने के लिए उन्हें छुट्टियों का सदुपयोग अपने शहर में ही स्थित ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस सेंटर में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेकर करना चाहिए। यह बात उन्हें जम गई, लेकिन कहां जाएं, किससे मिलें, इन बातों को लेकर उनके मन में हिचकिचाहट थी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। काउंसलर के प्रेरित करने पर वह अपने शहर की एक ऑटोमोबाइल कंपनी में गए और वहां के सर्विस इंजीनियर से अपने यहां काम सिखाने का अनुरोध किया। उनकी विनम्रता और लगन देख आखिरकार उन्हें वहां रख लिया गया। नतीजा यह हुआ कि मई-जून की छुट्टी के दो महीने में उन्होंने वहां पर्याप्त प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल कर ली। चूंकि थ्योरी उन्होंने पहले ही पढ़ रखी थी, इसलिए जब उस पर व्यावहारिक अमल करने का मौका मिला, तो उन्हें खूब मजा आया। उनकी इस फास्ट लर्निग से वहां के सर्विस इंजीनियर भी इतने खुश हुए कि उन्हें वहीं नौकरी करने का ऑफर दे दिया। हालांकि समर ने वहां ज्वाइन नहीं किया, क्योंकि एक तो उनका एक साल का कोर्स बाकी था और दूसरे, काउंसलर ने उन्हें संयम बनाए रखते हुए दूसरी कंपनियों/तकनीकों के साथ काम सीखने को कहा था, ताकि वे अपनी व्यावहारिक योग्यता को और निखार सकें। पढ़ाई के चौथे साल में उन्होंने पार्टटाइम में अपने शहर की कई दूसरी ऑटोमोबाइल कंपनियों के यहां काम सीखा। इस अनुभव ने उनका कॉन्फिडेंस लेवल तो बढ़ाया ही, उनके सामने अपने शहर में ही नौकरी के तमाम अवसर पैदा कर दिए। जब उनका कोर्स पूरा हुआ, तो उन्होंने उसी शहर की एक बड़ी कंपनी के आकर्षक जॉब ऑफर को स्वीकार कर लिया। उस कंपनी की तरफ से ही बाद में उन्होंने कैड कोर्स भी कर लिया।
न करें इंतजार: अगर आप भी अपने लिए करियर की राहें आसान करना चाहते हैं, तो आगामी छुट्टियों में समय गंवाने की बजाय अपनी स्ट्रीम से जुड़ी इंडस्ट्री के साथ जुड़ने का उपक्रम करें। कहां, क्यों, कैसे की हिचकिचाहट छोड़ कर अपने शहर, आसपास जो भी इंडस्ट्री मिले, उसके संबंधित अधिकारी से मिलें, उनसे प्रैक्टिकल काम सिखाने का निवेदन करें। अपनी लगन और मेहनत का भरोसा दिलाएं। सच्चे मन से प्रयास करेंगे, तो कोई भी आपको मना नहीं करेगा।
फायदे ही फायदे: अगर आप अपनी रुचि के क्षेत्र में हुनर को निखारने का प्रयास करते हैं, तो इससे न सिर्फ आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि इससे आपको आगे चलकर फायदे भी मिलेंगे। आपको अपने शुरुआती प्रयासों में ही जॉब भी आसानी से मिल सकती है। आप औरों से अच्छे पैकेज पर नौकरी पा सकते हैं। हो सकता है कि आपकी लगन देखकर ट्रेनिंग देने वाला संस्थान ही आपको जॉब ऑफर कर दे।

Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: जागरण समाचार 
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