Monday, May 8, 2017

अदालतों में बढ़ रहे पेंडिंग केस, ज्यूडिशियल सर्विस कॅरिअर का अच्छा विकल्प

किसी भी देश की न्यायिक व्यवस्था में न्यायाधीश का पद सबसे सम्मानीय माना जाता है। लेकिन वर्तमान में देशभर के न्यायालयों में बड़ी संख्या में जजों के पद रिक्त हैं। इसकी वजह से कोर्ट में पेंडिंग केस की संख्या लगातार बढ़ रही है। पेंडिंग केस
के निपटारे के लिए आने वाले समय में विभिन्न स्तर पर जजों की भर्ती की जा सकती है। ऐसे में ज्यूडिशियल सर्विस युवाओं के कॅरिअर का एक बेहतर विकल्प बन सकता है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में जजों के 40 फीसदी पद खाली हैं। जबकि निचली अदालतों में 15 हजार से ज्यादा जजों की जरूरत है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल, 2016 तक देशभर में प्रत्येक जिला न्यायाधीश पर औसतन 1350 केस पेडिंग हैं। अदालतों में लंबित मामलों की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में औसतन प्रत्येक जिला न्यायाधीश पर 2 हजार 513, पश्चिम बंगाल में 1 हजार 963 और दिल्ली में 1 हजार 449 केसेस हैं। इतनी बड़ी संख्या में पेंडिंग केस होने से जजों की नियुक्तियों की संभावनाएं बढ़ी हैं। 
विभिन्न स्तरों पर होती है नियुक्ति: प्रत्येक राज्य के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जजों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह लेकर की जाती है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज के अलावा असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट जज भी न्यायालय में वर्कलोड के अनुसार नियुक्त किए जाते हैं। हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से, संबंधित राज्यों के गर्वनर और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह लेने के बाद की जाती है। हाईकोर्ट में बतौर जज नियुक्त होने के लिए कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर रहे हों या कम से कम 10 वर्ष तक उच्च न्यायालय या सर्वाेच्च न्यायालय में वकालत का अनुभव होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के लिए उच्च न्यायालय में कम से कम 5 वर्ष तक काम का अनुभव होना चाहिए। 
लॉ से बैचलर डिग्री जरूरी: जज बनने के लिए लॉ से बैचलर डिग्री करनी आवश्यक है। एलएलबी या एलएलम कर चुके छात्र जज बनने के योग्य होते हैं। किसी भी स्ट्रीम से 12वीं करने के बाद छात्र कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट (क्लैट) के माध्यम से देशभर की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले सकते हैं। इसके अलावा कुछ संस्थान खुद के एंट्रेंस टेस्ट भी आयोजित करते हैं। कुछ संस्थानों में छात्रों को सीधे क्वालिफाइंग मार्क्स के आधार पर भी प्रवेश दिया जाता है। कोर्स पूरा करने के बाद उम्मीदवारों का बार काउंसिल ऑफ इंडिया में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। 
हर राज्य में होती है ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा: डिस्ट्रिक्ट कोर्ट या सेशन कोर्ट में जजों की भर्ती के लिए प्रत्येक राज्य ज्यूडिशियल सर्विस एग्जामिनेशन आयोजित करता है। यह परीक्षा तीन स्तर पर आयोजित की जाती है। पहले स्तर पर छात्रों को प्रिलिमिनरी एग्जामिनेशन क्लियर करना होता है। यह परीक्षा वैकल्पिक होती है। इसके स्कोर के आधार पर छात्रों को मेंस परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। मेंस परीक्षा में सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाते हैं। मेंस में जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए औसतन 60 फीसदी और एस, एसटी छात्रों के लिए 50 फीसदी अंक हासिल करना आवश्यक होता है। इसके बाद छात्रों को इंटरव्यू क्लियर करना होता है तब जाकर पोस्टिंग होती है। हालांकि राज्यों के अनुसार क्वालिफाइंग मार्क्स और सिलेबस अलग हो सकता है। छात्र सिलेबस की जानकारी के लिए संबंधित राज्यों की पब्लिक सर्विस कमीशन की वेबसाइट से जानकारी ले सकते हैं। न्यायिक सेवा में अच्छा वेतन, सुविधाएं और प्रतिष्ठा नौकरी के साथ जुड़ी होती हैं।
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साभार: भास्कर समाचार 
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