कृषि ऋण माफी के लिए केंद्र का मुंह ताक रहे राज्यों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दो टूक जवाब दिया है। जेटली ने कहा है कि कृषि ऋण माफी का खर्च राज्यों को अपने खजाने से उठाना होगा। इसके लिए केंद्र पैसा नहीं
जेटली से जब महाराष्ट्र सरकार के फैसले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि केंद्र इसके लिए अपने खजाने से पैसा नहीं देगा। राज्यों को यह काम अपने आप करना होगा। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार को कुछ नहीं कहना है। रबी मौसम की फसल बेहतर रहने के बावजूद कई राज्यों में किसान कर्ज माफ करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल घरेलू और विदेशी बाजार में कृषि वस्तुओं के दाम गिरने के कारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन संप्रग सरकार ने वर्ष 2008 में किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला किया था। उस समय इसके क्रियान्वयन पर 56 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की बात कही गई थी। हालांकि, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने जब इसके क्रियान्वयन का ऑडिट किया तो इसमें कई खामियां सामने आईं।
पहले उत्तर प्रदेश और अब महाराष्ट्र देश के दो सबसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में किसानों पर बकाये कर्ज की माफी के बाद दूसरे राज्यों में भी इस तरह की मांग उठने लगी है। किसानों के हितों की बात करने वाले संगठन कई राज्यों में सड़क पर उतर आए हैं। लेकिन, जानकारों का कहना है कि किसानों की कर्ज माफी इन राज्यों के लिए आर्थिक तौर पर बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है।
विभिन्न राज्यों में कृषि ऋण की माफी को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। ज्यादातर लोगों का मानना है कि किसानों को उनकी खेती के लिए ब्याज मुक्त ऋण मिलना चाहिए।
इस मसले पर केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कई बड़े राज्यों में वहां के किसानों को बिना ब्याज के कर्ज मुहैया कराया जाता है। लेकिन जिन राज्यों में ऐसा नहीं होता है, उनके मुख्यमंत्री किसानों के हितों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने से बाज नहीं आते हैं।
‘जागरण’ से बातचीत में सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को उनकी खेती के लिए फसल ऋण पर पांच फीसद ब्याज सहायता देती है। यानी जिस ब्याज दर पर किसान कर्ज लेता है, उसमें पांच फीसद की मदद केंद्र सरकार उठाती है। किसानों को खेती के लिए नौ फीसद पर ऋण मिलता है। ऐसे में किसानों को केवल चार फीसद की ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होता है। सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और पंजाब राज्य अपने खजाने से चार फीसद की अतिरिक्त सहायता भी देते हैं। इसके चलते इन राज्यों के किसानों को ब्याज रहित ऋण मिलता है। सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलने के अंदाज में कहा कि बिहार के किसानों को ब्याज रहित ऋण भला क्यों नहीं मिल पाता? यह वहां की नाकामी है।
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साभार: जागरण समाचार
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