हरियाणा सरकार की 2013 की नोटिफिकेशन के तहत आर्थिक आधार पर सामान्य श्रेणी के लिए 10 फीसद आरक्षण का प्रावधान करने को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि
आरक्षण का आधार केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन ही हो सकता है, इसलिए आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण को रद करने की अपील की गई है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। झज्जर निवासी सुरेश चंद्र ने याचिका के माध्यम से कोर्ट को बताया कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के कारण प्रदेश में कुल आरक्षण 67 फीसद हो गया है। इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए याची ने कहा कि आरक्षण 50 फीसद से अधिक नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में और तय मानकों का अनुसरण करने के बाद ही आरक्षण 50 फीसद से अधिक हो सकता है। याची ने कोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार के एक्ट के माध्यम से 57 फीसद आरक्षण दिया गया है, जबकि 2013 की नोटिफिकेशन के माध्यम से आर्थिक पिछड़ा वर्ग को 10 फीसद आरक्षण दिया गया है। याची ने कहा कि उनकी मुख्य दलील आरक्षण 50 फीसद से ज्यादा होने की और आर्थिक आधार पर आरक्षण का संविधान में प्रावधान न होना है। बहस के दौरान हाई कोर्ट ने याची से याचिका दाखिल करने का कानूनी अधिकार पूछा। याची ने कोर्ट के सवाल पर याचिका दायर करने के समर्थन में अपना पक्ष रखा।
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: जागरण समाचार
For getting Job-alerts and Education News, join our Facebook Group “EMPLOYMENT BULLETIN” by clicking HERE. Please like our Facebook Page HARSAMACHAR for other important updates from each and every field.