Tuesday, June 13, 2017

बचत और निवेश: नई पीढ़ी निवेश के लिए पैसा किस तरह बचाएगी

मधुपम कृष्णा (सदस्य,फाइनेंशियल प्लानर्स गिल्ड ऑफ इंडिया)
क्या कभी यह सोचा है कि आप बच्चे को कब से निवेश और बचत के बारे में बता सकते हैं? क्या अाज ऐसी कोई व्यवस्था है, जिससे घरों में बचत को फिर से बढ़ावा दिया जा सके? इसके लिए यह समझना है कि नई पीढ़ी को
कब क्या समझाया जाए, ताकि घरों में बचत की प्रवृत्ति विकसित हो सके और आर्थिक संकट का सामना करना पड़े। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। बहुत छोटेबच्चे यही जानते हैं कि पैसा एटीएम से आता है। उन्हें यह नहीं मालूम कि उनके पिता इसमें अपना शरीर और समय झोंकते हैं। हमारे देश में हर घर में इस तरह का शिक्षण अपनी तरह से होता है कि कैसे पैसा बचाया जाए। फिर भी इस दौर में यह जरा कठिन है। यह पिता की जिम्मेदारी होती है कि बच्चे को हिसाब-किताब के बारे में समझाएं। 
बच्चा 5-6 वर्ष का है तो उससे पैसे के बारे में पूछा जाना चाहिए। उसे सभी मूल्यों के नोट और सिक्के दिखाकर बताना होगा कि हर चीज़ की कीमत होती है। भले ही आइसक्रीम हो, स्कूल की ड्रेस हो, वैन हो, मैगी हो, फल हो, गाड़ी हो, पंखा हो, बैंडएड या बिजली हो। इस उम्र तक उसे यह समझ में जाना चाहिए कि पैसे से ही चीजों को खरीदा जा सकता है। उसे यह भी समझाया जाना चाहिए कि आप महीनेभर काम करते हैं, तब घर में पैसा आता है। उसे एटीएम पर ले जाएं और बताइए कि एटीएम नहीं, वरन आपकी कंपनी या जहां आप काम करते हैं, वे बैंक में पैसा डालते हैं, जो एटीएम से मिलता है। बच्चे को बैंक ले जाकर समझाना चाहिए कि किस तरह से चेक डाले जाते हैं और किस तरह से एटीएम पैसा देता है। 
बच्चा सात से नौ वर्ष का है तो उसे कुछ पैसा संभालने के लिए दिया जा सकता है। इसे पॉकेट मनी भी कह सकते हैं। उसकी जरूरतों के बारे में बात करिए। यदि वह कहता है कि उसे टैब चाहिए, तो उसे बताना होगा कि इतना पैसा वह अपनी पॉकेट मनी से बचाएगा, तो इतने में टैब खरीदा जा सकता है। जब आप कुछ शॉपिंग करने जा रहे हैं तो इस उम्र में बच्चे से कहें कि वह पैसा गिने और पेमेंट करें। बच्चे को ही बैलेंस गिनने दें। यह एक बार नहीं बार-बार करिए। 
आपके बच्चे को कुछ लेन-देन भी करने दीजिए। उसे चेकबुक और अकाउंट बुक दोनों का अंतर समझाएं। उसे 100 रुपए का नोट देकर कुछ किराना आदि का सामान खरीदने दें। हो सकता है कि वह गलती करें तो वहां उसे समझाएं। 
पर्सनल फाइनेंस में पैसा संभालना कला है। यह रातों-रात नहीं आता और इसी से उसे मदद मिलेगी। बच्चे को महीने के खर्च के बारे में बताएं। उसे बताएं कि आप जो बचत कर रहे हैं, उसका मकसद क्या है। बचत क्या है और निवेश क्या, इसका अंतर बताएं। 
नौ से 13 वर्ष तक के बच्चे को निवेश और कर्ज के बारे में बताया जाना चाहिए। इन्हें चक्रवर्ती और साधारण ब्याज के बारे में बताया जाना चाहिए। सेविंग बैंक खाता, रिकरिंग और एफडी तीनों के बारे में इन्हें समझाया जाना चाहिए। इनको समझाते हुए उसे बताएं कि किस तरह से ये उसका भविष्य संवार सकते हैं। बच्चे का भी एक अकाउंट खुलवा दें। उसे उसमें से खर्च करने और जमा करने दें, ताकि उसे समझ में सके कि डेबिट-क्रेडिट क्या है। 
कर्ज के खतरों के बारे में बच्चों को जानकारी देना जरूरी है। किस तरह से होम लोन में किश्त भरते हुए पैसा अदा किया जाता है। साथ ही यह बताएं कि किस तरह से क्रेडिट कार्ड काम करता है। यह भी इसी उम्र में बताएं कि यदि होम लोन में आप ज्यादा पैसा किश्त के रूप में भरेंगे तो आपका लोन जल्दी पट जाएगा। किसी भी तरह से बच्चे में यह प्रवृत्ति जानी चाहिए कि वह कर्ज पर आधारित इकोनॉमी पर भरोसा नहीं करे। क्योंकि इस तरह की अवधारणा से उसे भविष्य में परेशानी होगी। यह भी बताएं कि कितनी जरूरत हो तभी पर्सनल लोन के लिए बैंक जाएं। समझ आने पर उसे बताएं कि वह इस स्थिति में होता तो क्या करता। 
पैसे की कद्र करना बच्चों को सिखाना बहुत जरूरी है। इसके लिए बेहतर है कि आपने जो इन्वेस्टमेंट किए हैं, या जो कुछ भी खरीदा है, उसके औचित्य और फायदे के बारे में बच्चों को जानकारी दीजिए। हो सकता है कि इसके लिए आपको स्वयं को भी शिक्षित करने के लिए समय देना पड़े। कुछ उदाहरण देते हुए अपने बच्चों को समझाएं कि कहां पैसा लगाया जाना चाहिए और कहां नहीं। उधार कब लेना है और जरूरत के मुताबिक कितना कम से कमलेना चाहिए। 
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
For getting Job-alerts and Education News, join our Facebook Group “EMPLOYMENT BULLETIN” by clicking HERE. Please like our Facebook Page HARSAMACHAR for other important updates from each and every field.