पं. विजयशंकर मेहता (जीने की राह)
हर रिश्ते में एक गंध होती है। प्रेम से निभाया जाए तो सुगंध में बदल जाती है और यदि स्वार्थ बीच में जाए तो फिर उसे दुर्गंध बनने से भी कोई नहीं रोक सकता। खून के रिश्ते ऊपर वाला बनाकर देता है। इसे केवल भाग्य
मानें। हमारे खून का हर रिश्ता एक सौभाग्य है। आज दुनिया रक्तदान दिवस मना रही है। रक्तदान अवश्य करें और रक्तमान भी। इन दिनों परिवारों में खून के रिश्तों की कद्र कम होने लगी है। लोग बड़े गर्व से कहते हैं खून से ऊपर प्रेम का रिश्ता होता है लेकिन,अब प्रेम समझने वाले लोग बहुत कम रह गए हैं और खून को केवल हिंसा से जोड़ लिया गया। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। रिश्ते निभाने में सबसे अधिक चुनौती होती है, जब आप अपने घर-परिवार में होते हैं। बाहर की दुनिया में रिश्ते निभाने में अभिनय, चातुर्य, कुटिलता, समझदारी इन सबसे काम चलता है लेकिन, घर के रिश्ते निभाने में बहुत सहज होना पड़ता है और यही चुनौती बन जाती है। जब कभी घर में रिश्ते निभाने में परेशानी-सी लगे तो एक संकल्प लीजिए कि रिश्तों में सिर्फ ओहदे का सम्मान करेंगे। सामने वाले के व्यवहार स्वभाव पर ज्यादा टिकते हुए रिश्तों के पीछे ओहदा देखिए। यहां ओहदे से मतलब है वे उम्र के साथ-रिश्ते में भी आपसे बड़े हों। ऐसे समय सिर्फ ओहदे पर टिकिए और यह मानिए कि ये बड़े हैं और हमें इनका मान करना है। जिस दिन रिश्तों में ओहदे के सम्मान का भाव जाता है, खून के रिश्ते का मान ही बदल जाता है। ऐसा मानकर चलिए कि ऊपर वाले ने खून का वह रिश्ता आपको भेंट में दिया है। यदि आप इसे ठीक से नहीं निभा पाते तो समझो परमपिता द्वारा दिए गए उपहार का अपमान कर रहे हैं।
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार
For getting Job-alerts and Education News, join our Facebook Group “EMPLOYMENT BULLETIN” by clicking HERE. Please like our Facebook Page HARSAMACHAR for other important updates from each and every field.