मैनेजमेंट फंडा (एन. रघुरामन)
ऋषि जवाब देते हैं, 'कश्मीर का राजा एक नाबालिग था और चूंकि नाबालिग यह निर्णय नहीं ले सकता कि सेना किसकी ओर से लड़े, इसलिए पांडवों और कौरवों ने उनके पक्ष में लड़ने का आग्रह करने वाला पत्र कश्मीर राज्य को नहीं भेजा।' इतना कहकर सुरक्षाकर्मी ने हमारी आंखों में देखा और गर्व से कहा, 'उन दिनों में भी युद्ध में नैतिकता थी और राजाओं को वैसे ही निमंत्रित किया जाता था जैसे आज संयुक्त राष्ट्र कई देशों से आतंकवाद से लड़ने का आग्रह करता है।'
फिर उन्होंने पूछा, 'क्या आप जानते हैं कि नाबालिग कैसे कश्मीर का राजा बना।' सच कहूं मैं तो बिल्कुल भी नहीं जानता था और मेरे साथी कश्मीरी यात्री ने कहा कि उसने सुना है कि भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम ने युद्ध में राजा के दोनों भाइयों को मार दिया था। उस सुरक्षाकर्मी ने स्वीकार में गर्दन हिलाई अौर कहा, 'हां, आपने बिल्कुल सही कहा। श्रीकृष्ण द्वारा कंस के वध से नाराज जरासंन्हू, जो इन दोनों का रिश्तेदार था, ने गोवानंद को श्रीकृष्ण से लड़ने बुलाया लेकिन, श्रीकृष्ण के भाई बलराम ने बीच में हस्तक्षेप कर गोवानंद को मार दिया, जिसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। इसलिए उसका भाई दामोदर राजा बन गया। बरसों बाद जब सत्यभामा से विवाह के लिए स्वयंवर में शामिल होने श्रीकृष्ण गांधार जा रहे थे तो उन्हें कश्मीर के रास्ते से जाना था, क्योंकि तब गांधार कश्मीर एक ही जनपद माने जाते थे। तब दामोदर ने अपने भाई की हत्या का बदला लेेने की सोची लेकिन, वह श्रीकृष्ण के हाथों मारा जाता है। याधुकुल श्रीकृष्ण को गांधार कश्मीर के विलय की सलाह देते हैं लेकिन, श्रीकृष्ण यह कहकर इनकार कर देते हैं कि रानी यशोमति के गर्भ में भावी राजा पल रहा है। इस तरह राज्यों का विलय करना नैतिक रूप से ठीक नहीं है। वे फिर महिला शासक के रूप में यशोमति का राज्याभिषेक कर देते हैं और यशोमति दुनिया की पहली महिला शासक बनती है। महाभारत के ठीक पहले वह एक बच्चे को जन्म देती है, जिसका नाम गोवानंद द्वितीय रखा जाता है और चूंकि यह राजा नाबालिग था तो उसे युद्ध का आमंत्रण नहीं भेजा गया। कश्मीर इतना पुराना है।' एक मुस्कान के साथ उन्होंने अपनी कहानी खत्म की।
मैं तो उन्हें सुनने के लिए घंटों वहां खड़ा रह सकता था लेकिन, मुझे फ्लाइट पकड़नी थी। सच हो या झूठ, उनके पास सुनाने के लिए असाधारण कहानी थी, जिसने उनका चेहरा गर्व से भर दिया।
फंडा यह है कि अापकीअपनी-अपनी संस्कृति और इतिहास पर पांच मिनट का ज्ञान आपको एकदम अलग साबित कर सकता है।
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मैं शनिवार को रायपुर के लिए 'दूधवाला' फ्लाइट में सवार होने को था। सिक्योरिटी पर एक यात्री का शर्ट की गोपनीय जेब में रखा पेन जांच के समय निकालते वक्त उसके जनेऊ में उलझ गया। यह देख सुरक्षाकर्मी ने
पूछा, 'क्या अाप कश्मीरी हैं?' यात्री से मिला जवाब भी एक प्रश्न ही था, 'आप कश्मीर के बारे में क्या जानते हैं?' उन सुरक्षाकर्मी महोदय ने खुद को चेक पोस्ट की जांच से मुक्त कर लिया और उस यात्री तथा मुझे साथ लेकर थोड़े अलग होकर वे कश्मीर को लेकर अपनी जानकारी बताने लगे। मैं तो अपनी संस्कृति और इतिहास पर उनका ज्ञान देखकर दंग रह गया। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कश्मीर तो महाभारत के समय भी था जब इस देश के ज्यादातर राज्यों को उनका मौजूदा नाम भी नहीं मिला था। हमारा पंचांग, जिसे कश्मीरी में 'जंत्री' कहते हैं 5093 साल पुराना है, जिसका मतलब है कि वह तब से अब तक लगातार बना हुआ है। आप में से ज्यादातर पंचांग को विक्रम संवत या शाक्त संवत का बताते हैं, हम इसे 'सप्तर्षि सवंत' कहते हैं।' उन्होंने कहना जारी रखा, 'हमारे बारे में एक पुराण भी हैं, जिसकी शुरुआत राजा जनमेजय (अर्जुन का पड़पोता और अभिमन्यू का पोता) और वैशंपायन ऋषि के बीच संवाद से शुरू होता है। उस बातचीत में जनमेजय वैशम्पायन ऋषि से पूछते हैं कि जब अखंड भारत के सारे राज्यों ने धर्म का पक्ष (जैसा उनके राजाओं ने समझा) लेते हुए महाभारत के युद्ध में भाग लिया और पांडवों या कौरवों के साथ खड़े हुए तो कश्मीर की सेना ने उस युद्ध में क्यों भाग नहीं लिया?' ऋषि जवाब देते हैं, 'कश्मीर का राजा एक नाबालिग था और चूंकि नाबालिग यह निर्णय नहीं ले सकता कि सेना किसकी ओर से लड़े, इसलिए पांडवों और कौरवों ने उनके पक्ष में लड़ने का आग्रह करने वाला पत्र कश्मीर राज्य को नहीं भेजा।' इतना कहकर सुरक्षाकर्मी ने हमारी आंखों में देखा और गर्व से कहा, 'उन दिनों में भी युद्ध में नैतिकता थी और राजाओं को वैसे ही निमंत्रित किया जाता था जैसे आज संयुक्त राष्ट्र कई देशों से आतंकवाद से लड़ने का आग्रह करता है।'
फिर उन्होंने पूछा, 'क्या आप जानते हैं कि नाबालिग कैसे कश्मीर का राजा बना।' सच कहूं मैं तो बिल्कुल भी नहीं जानता था और मेरे साथी कश्मीरी यात्री ने कहा कि उसने सुना है कि भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम ने युद्ध में राजा के दोनों भाइयों को मार दिया था। उस सुरक्षाकर्मी ने स्वीकार में गर्दन हिलाई अौर कहा, 'हां, आपने बिल्कुल सही कहा। श्रीकृष्ण द्वारा कंस के वध से नाराज जरासंन्हू, जो इन दोनों का रिश्तेदार था, ने गोवानंद को श्रीकृष्ण से लड़ने बुलाया लेकिन, श्रीकृष्ण के भाई बलराम ने बीच में हस्तक्षेप कर गोवानंद को मार दिया, जिसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। इसलिए उसका भाई दामोदर राजा बन गया। बरसों बाद जब सत्यभामा से विवाह के लिए स्वयंवर में शामिल होने श्रीकृष्ण गांधार जा रहे थे तो उन्हें कश्मीर के रास्ते से जाना था, क्योंकि तब गांधार कश्मीर एक ही जनपद माने जाते थे। तब दामोदर ने अपने भाई की हत्या का बदला लेेने की सोची लेकिन, वह श्रीकृष्ण के हाथों मारा जाता है। याधुकुल श्रीकृष्ण को गांधार कश्मीर के विलय की सलाह देते हैं लेकिन, श्रीकृष्ण यह कहकर इनकार कर देते हैं कि रानी यशोमति के गर्भ में भावी राजा पल रहा है। इस तरह राज्यों का विलय करना नैतिक रूप से ठीक नहीं है। वे फिर महिला शासक के रूप में यशोमति का राज्याभिषेक कर देते हैं और यशोमति दुनिया की पहली महिला शासक बनती है। महाभारत के ठीक पहले वह एक बच्चे को जन्म देती है, जिसका नाम गोवानंद द्वितीय रखा जाता है और चूंकि यह राजा नाबालिग था तो उसे युद्ध का आमंत्रण नहीं भेजा गया। कश्मीर इतना पुराना है।' एक मुस्कान के साथ उन्होंने अपनी कहानी खत्म की।
मैं तो उन्हें सुनने के लिए घंटों वहां खड़ा रह सकता था लेकिन, मुझे फ्लाइट पकड़नी थी। सच हो या झूठ, उनके पास सुनाने के लिए असाधारण कहानी थी, जिसने उनका चेहरा गर्व से भर दिया।
फंडा यह है कि अापकीअपनी-अपनी संस्कृति और इतिहास पर पांच मिनट का ज्ञान आपको एकदम अलग साबित कर सकता है।
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साभार: भास्कर समाचार
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