भारतीयमौसम विभाग ने इस बार भी सामान्य बारिश की घोषणा की है। देशभर में करीब 98% बारिश का अनुमान है। यह सूखे से जूझ रहे देश के लिए अच्छी खबर है। लेकिन मौसम विभाग के एक अध्ययन ने चिंता
बढ़ा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 50 सालों से बरसाती बादलों का पतला होना लगातार जारी है। साथ ही बल्क में बारिश कराने वाले कम ऊंचाई वाले बादलों में भी कमी रही है। इससे बारिश कम हो रही है और तापमान बढ़ रहा है। भारत में पहली बार बादलों की मोटाई और कम ऊंचाई वाले बादलों पर स्टडी की गई है। आईएमडी के रिटायर वैज्ञानिक के जायसवाल के नेतृत्व में यह स्टडी की गई है। आईएमडी जर्नल मौसम में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक कम ऊंचाई वाले बादल बल्क में बारिश कराते हैं। 1960 से 2010 के बीच इसमें हर दशक 0.45% की कमी रही है। ये कमी हर सीजन में रही है। लेकिन मानसूनी सीजन में यह कमी 1.22% की है, जो चिंताजनक है। भारत में 70% बारिश जून से सितंबर मानसूनी सीजन में होती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हर साल मानसूनी सीजन में 0.23 दिन की कमी रही है। इसका मतलब यह हुआ कि 50 साल में एक मानसूनी दिन कम हो गया। एक मानसूनी दिन में 2.55 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बारिश होती है। यह कमी देश के हर हिस्से में दर्ज की गई है। स्टडी के मुताबिक कम ऊंचाई वाले बादल और बरसात के दिन के बीच सीधा संबंध है। बादलों का पतला होने से तापमान भी बढ़ रहा है।
60% पृथ्वी की सतह बादलों से ढंकी हुई है। ये मौसम और जलवायु में अहम भूमिका अदा करते हैं। सूर्य की रोशनी को नियंत्रित करती है, रेडिएशन को पृथ्वी पर आने से रोकती है। बारिश और बर्फबारी करती है। जल-वाष्प को बादलों में बदल देती है। इससे बारिश होती है। इस तरह वैश्विक ऊर्जा को नियंत्रित करती है। मौसम का सटीक अनुमान लगाने में बादलों का यह लगातार बदलने वाला आकार मौसम की सटीक भविष्यवाणी में मुश्किल पैदा कर रही है।
मौसम विभाग के 215 स्टेशन पर प्रशिक्षित आब्जर्वर द्वारा बादलों का निरीक्षण किया है। ये ऑब्जर्वर्स बादलों की मोटाई और पतलेपन की बारीकियों को समझ सकते हैं। 61% स्टेशनों में कम ऊंचाई वाले बादलों में कमी देखी गई। मानसून सीजन के दौरान सबसे मोटे बादल 1961 में देखे गए। उस समय देशभर में इनकी मात्रा 46.7 फीसदी थी, जो 2009 में घटकर 33.5 ही रह गई। स्टडी में यह भी देखा गया कि कम ऊंचाई वाले बादल गंगा के कछार मैदानों और उत्तरपूर्वी भारत में बढ़े हैं जबकि बाकी हिस्सों में इनमें कमी आई है।
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साभार: भास्कर समाचार
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