पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुसीबतें बढ़ गई हैं। उन्हें हाईप्रोफाइल पनामा पेपर्स लीक मामले में संयुक्त जांच टीम (जेआईटी) के सवालों से गुजरना पड़ेगा। जेआईटी के प्रमुख वाजिद जिया नेेेे प्रधानमंत्री को मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ बुधवार सुबह 11 बजे पेश होने को कहा है। भ्रष्टाचार मामलों की जांच कर रही इस समिति के सामने पेश होने वाले वह देश के पहले सिटिंग प्रधानमंत्री होंगे। यह समिति पिछले महीने अनुचित कारोबारी सौदों को लेकर शरीफ के बेटों हुसैन और हसन से पूछताछ कर चुकी है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। जेआईटी ने शनिवार को यह समन भेजा था। शरीफ ने कजाकिस्तान से लौटने के बाद रविवार को लाहौर में अपने करीबियों के साथ इस मसले पर चर्चा की। सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री मरियम औरंगजेब ने कहा कि शरीफ जांच टीम के समक्ष पेश होंगे।
मनी लांड्रिंग का पैसा विदेशी कंपनियों में लगाने का आरोप: शरीफ और उनके परिवार पर कथित मनी लांड्रिंग का पैसा विदेशी कंपनियों में लगाने का आरोप है। जांच टीम लंदन में नवाज शरीफ के परिवार के स्वामित्व वाली संपत्तियों के लिए इस्तेमाल में लाए गए धन की भी जांच कर रही है। पिछले साल सामने आई पनामा के अवैध निवेशकों की सूची मे शरीफ परिवार का नाम भी था। मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच मई को छह सदस्यीय जेआइटी का गठन किया था।
चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने बनाई खास फोर्स: कजाकिस्तान के राजधानी अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ देखकर भी अनदेखा कर दिया था। दरअसल,पाकिस्तान में हाल ही में दो चीनी नागरिकों की हत्या हो गई थी। चीनी राष्ट्रपति इससे काफी नाराज हैं। पाकिस्तान चीन को मनाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए अब स्पेशल फोर्स बनाने की घोषणा की है। चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा से जुड़ी परियोजनाओं के कारण चीन के सैकड़ों नागरिक पाकिस्तान में रह रहे हैं। इस परियोजना बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजांग प्रांत से जोड़ता है। पाकिस्तान किसी भी कीमत पर चीन की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता है। यही वजह है कि खैबर-पख्तूनख्वा की सरकार ने अपने यहां रह रहे विदेशियों की सुरक्षा के लिए 4,200 सुरक्षाकर्मियों की एक विशेष फोर्स तैयार की है। न्यूज इंटरनेशनल की एक खबर के मुताबिक, यह फौज खासतौर पर विदेशियों की हिफाजत पर ध्यान देगी। माना जा रहा है कि ये विदेशी पाकिस्तान में रहने वाले चीन के नागरिक ही हैं।
पाकिस्तानी जेलों में कैद 132 भारतीय: सरकार को उम्मीद है कि पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय कैदियों को भी वहां की सरकार रिहा कर देगी। सरकार के मुताबिक मौजूदा समय में पाकिस्तान के जेलों में 132 भारतीय कैदी बंद हैं, जिनमें से 57 ने अपनी सजा पहले ही पूरी कर ली है। इस मामले पर पाकिस्तान का कहना है कि भारत पहले उनकी नागरिकता सुनिश्चित करे तभी उन्हें रिहा किया जाएगा।
पाकिस्तानी जेलों में कैद 132 भारतीय: सरकार को उम्मीद है कि पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय कैदियों को भी वहां की सरकार रिहा कर देगी। सरकार के मुताबिक मौजूदा समय में पाकिस्तान के जेलों में 132 भारतीय कैदी बंद हैं, जिनमें से 57 ने अपनी सजा पहले ही पूरी कर ली है। इस मामले पर पाकिस्तान का कहना है कि भारत पहले उनकी नागरिकता सुनिश्चित करे तभी उन्हें रिहा किया जाएगा।
भारत ने 11 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया, बाघा बॉर्डर से स्वदेश लौटे: भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को भले ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर फांसी की सजा सुना दी, लेकिन भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश के लिए बड़ा दिल दिखाते हुए उसके 11 कैदियों को रिहा कर दिया है। सोमवार को इन सभी कैदियों को बाघा बॉर्डर से स्वदेश भेजा गया। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि कैदियों की रिहाई मानवीय मुद्दा है और इसे जाधव के मामले पर पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुए शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के पीएम के बीच हुई मुलाकात के बाद सरकार ने 11 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया।
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साभार: भास्कर समाचार
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