Sunday, June 18, 2017

साथियों की गलत टिप्पणी पर सख्त प्रतिक्रिया जरूरी: जब सहकर्मी करे भद्दी टिप्पणी तो क्या करें

जिस तरह आप बोलते हैं, प्रतिक्रिया करते हैं, उससे आपकी छवि दफ्तर में बनती है। कभी-कभी कुछ साथी बेवजह की टिप्पणी करते हैं तो उन्हें कैसे चेतावनी दी जाए? जानते हैं इस बार हार्वर्डबिज़नेस रिव्यू से। साथ
में- कैसे बना सकते हैं काम की मजबूत रणनीति।
जब सहकर्मी करे भद्दी टिप्पणी तो ये उपाय: दफ्तर में सहकर्मी अपमाजनक टिप्पणी करे तो प्रतिक्रिया देना जाेखिमभरा होता है। लेकिन चुप रह जाना भी ठीक नहीं है। यह जातिसूचक या भद्दे कटाक्ष भी हो सकते हैं। अगर इन्हें रोका जाए तो ऐसी बातें करने वालों की हिम्मत और बढ़ेगी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। शोध बताते हैं कि अगर किसी टीका-टिप्पणी पर यह कहकर प्रतिक्रिया की जाए कि यह जातिसूचक कमेंट था, ताे इस बात की बहुत कम संभावना है कि कहने वाले के बर्ताव में कोई भी परिवर्तन आए। इसके स्थान पर कह सकते हैं कि मुझे पता है कि आप ऐसा नहीं कहना चाहते थे, लेकिन आपकी बात ने मुझे दुखी किया है। एक सवाल भी किया जा सकता है कि आपके कहने का मतलब क्या है। यह कहकर आप क्या कुछ साबित करना चाहते हैं? इससे वह अपने किए पर फिर सोचने पर मजबूर होगा। (स्रोत:हाउटू रिस्पॉन्ड टू एन ऑफेन्सिव कमेंट एट वर्क। एमी गालो।)
मजबूत रणनीति के लिए सबसे बात करना अहम: जब आप टीम को मैनेज कर रहे हों तो आपकी स्ट्रेटजी और लक्ष्य में टीम के साथियों की प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। पहले यह समझना जरूरी है कि कैसे आपके ग्रुप का काम बड़े परिदृश्य में फिट होगा। इसके लिए अपनी पूरी टीम से एक के बाद एक बात करना जरूरी है। निश्चित रूप से इसके लिए शुरुआत अपने बॉस से करना चाहिए। उनके अलावा कंपनी के अन्य लीडर्स से भी बात करनी जरूरी है। साथ ही साथियों और नीचे के कर्मचारियों से बात करनी भी जरूरी है। जब अाप बात करने जाएं तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि विषय की पूरी बेसिक समझ है। रणनीति का आरंभिक खाका बनाकर अन्य लोगों के इनपुट लेना अच्छा होता है। आप इस तरह बात शुरू कर सकते हैं- आप कहते हैं कि टीम की प्राथमिकता इनोवेशन होनी चाहिए। आपके हिसाब से हमारा फोकस क्या होना चाहिए। (स्रोत:हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यू मैनेजर्स हैंडबुक।)
जब मेल करना हो तो ये काम की बातें: जो ईमेल आप करते हैं उससे आपकी व्यावसायिक छवि प्रभावित होती है। सही प्रभाव के लिए पहले तय कर लेना बेहतर होता है कि ये कुछ बातें ईमेल में शामिल की जानी है। सबसे पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ईमेल िसर्फ उन्हीं लोगों को किया जाए, जिनके लिए वो उपयोगी है। कई बार सीसी में कई लोगों को रख दिया जाता है। ध्यान देने की बात यह है कि हम जो ईमेल भेजते हैं वो पाने वाले के इनबॉक्स में भी जगह घेरता है। दूसरी सबसे जरूरी बात है- सीधे मुद्दे की बात की जाए। जब विषय गंभीर हो तो रीडर को हर तरह की जानकारी देना जरूरी है। कोशिश यह होनी चाहिए कि उसे कम शब्दों में अधिक से अधिक जानकारी मिल जाए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बेवजह वन लाइनर का उपयोग हो। इससे रीडर को समझने में दिक्कत हो सकती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि कोई काम की जानकारी छूट जाए। (स्रोत:डिफिकल्ट कनवर्सेशंस। 20 मिनट्स मैनेजर सीरिज।)
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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