अरस्तू ने कहा है कि आलोचना को नज़रअंदाज करने का सबसे अच्छा तरीका है- कुछ मत कीजिए और कुछ कहिए भी मत। उन्होंने ऐसा क्यों कहा? असल में आलोचना हमेशा कड़वी लगती है। यह बात आलोचना करने
वाला भी जानता है, इसलिए बात को थोड़ा नर्म बनाने के लिए कई बार कहा जाता है कि "इसे पर्सनली मत लीजिए'। ऐसा इसलिए क्योंकि आलोचना सीधे दिल पर जाकर लगती है और इंसान की इच्छा तो हमेशा प्रशंसा पाने की ही होती है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। आलोचना के महत्व को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि इसका माध्यम और वजह क्या है। दरअसल रचनात्मक और हानिकारक आलोचना के बीच फर्क करना सीखना जरूरी है। रचनात्मक को स्वीकार कीजिए और हानिकारक को नजरअंदाज। समझदार लोग प्रशंसा को विनम्रता से स्वीकार करते हैं और आलोचना पर गंभीरता से विचार करते हैं।
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साभार: भास्कर समाचार
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