Sunday, June 18, 2017

विडम्बना: रोजाना 33 किसानों की खुदकुशी, पर इनसे जुड़े धंधे वाले कमा रहे हैं करोड़ों

मध्य प्रदेश का परसोना गांव। किसान सोने सिंह अपने परिवार के साथ घर की चौखट पर बैठे हैं। 42 डिग्री की तपती गर्मी के बीच पसीना पोछते हुए कहते हैं कि अब खेती करना बहुत मुश्किल हो गया है। वे
बताते हैं कि पिछले 15 साल हर बार नुकसान हो जाता है। इसलिए लगातार कर्जे में हैं। वैसे ये हालत देश में अकेले सोने सिंह की नहीं है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि 10 साल (2001-2011) में देश में 90 लाख किसान कम हो गए हैं और 3.8 करोड़ खेतिहर मजदूर बढ़ गए हैं। वहीं किसानी और खेती से जुड़े धंधे तेजी से बढ़ रहे हैं। किसान को भले ही फायदा हो रहा हो, लेकिन इनके जरिए कमाई करने वाले लोगों का धंधा अच्छा चल रहा है। पंपसेट, स्प्रिंकल, पाइप और केबल का सालाना व्यापार करीब एक लाख करोड़ रुपए का है। 
हर साल किसान की खेती करने की लागत 7-8 फीसदी बढ़ गई है। जबकि इस वर्ष बीते चार वर्ष की तुलना में अनाज और दालों की कीमतें सबसे नीचे चल रही हैं। वहीं दूसरी ओर खेती संबंधी तमाम कामों से जुड़ी कंपनियाें का लाभ हर साल करोड़ों रुपए में रहा है। केंद्र सरकार के द्वारा इसी वर्ष मई में सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी के मुताबिक वर्ष 2013 से लगातार हर वर्ष औसतन 12 हजार से अधिक किसान आत्म हत्या कर रहे हैं। यानी प्रतिदिन करीब 33 किसान। 
किसानों की खराब होती हालत पर बात करते हुए कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि अगर बढ़ी हुई महंगाई दर को हटा दिया जाए तो देश में बीते 25 वर्ष में किसान ने उपज में घाटा ही खाया है। लागत लगातार बढ़ रही है। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट, फिलीपींस का अध्ययन कहता है कि एशिया में धान पर होने वाले पेस्टिसाइड प्रयोग समय और श्रम की बर्बादी है। बावजूद इसके धान में 45 प्रकार के पेस्टीसाइड्स का उपयोग भारत में किया जा रहा है। 
किसानों के भरोसे चल रहे इन व्यवसायों में खूब मुनाफा:
  • फर्टिलाइजर - सिर्फ तीन बड़ी कंपनियों की कमाई 1200 करोड़: देश में किसानों की हालत भले ही खराब हो लेकिन फर्टिलाइजर की सबसे बड़ी तीन कंपनियों को वर्ष 2016-17 के दौरान 1255.23 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था। यह इससे पिछले वर्ष की तुलना में 37.45 फीसदी ज्यादा था। यानी साल दर साल इनकी आमदनी तो बढ़ रही है। सरकार इन्हें सब्सिडी भी देती है। इस बजट में 70 हजार करोड़ सब्सिडी का प्रावधान है। 
  • पेस्टीसाइड्स - टॉप कंपनियों को हुआ 900 करोड़ मुनाफा, 23% ज्यादा: इस क्षेत्र की टॉप तीन कंपनियों ने वर्ष 2016-17 में 895.89 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया। बीते वर्ष के मुकाबले यह 22.8 फीसदी अधिक था। बीते वित्त र्ष में इन्हीं कंपनियों ने 729.46 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया था। वर्ष 2014-15 में ही देश इसका कारोबार 28,600 करोड़ रु. पहुंच गया था। जो 7.5 फीसदी से प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। 
  • पंप - कंपनियां 125 करोड़ के लाभ में, किसानों को महंगा लोन: देश की तीन प्रमुख पंप सेट्स बनाने वाली कंपनियों का शुद्ध लाभ वर्ष 2016-17 में 125.29 करोड़ रुपए हुआ। पंपसेट, स्प्रिंकल, पाइप और केबल का संगठित बाजार सालाना करीब एक लाख करोड़ रुपए का है। कृषि उपकरण और ट्रैक्टर जैसी चीजों के लिए लोन 12% की दर पर मिलता है, जबकि कार 10% से कम ब्याज पर मिल जाता है।
  • बीज - प्रमुख कंपनियों को 85 करोड़ का लाभ, टैक्स में भी छूट: देश की प्रमुख तीन बीज निर्माता कंपनियों को वर्ष 2015-16 में 85.47 करोड़ रु. का मुनाफा हुआ है। ब्रेंडेड बीज कारोबार प्रतिवर्ष करीब 10% की रफ्तार से बढ़ रहा है। बीज का कारोबार 35 हजार करोड़ पहुंच गया है। किसान की फसलें सस्ती बिकती हैं, लेकिन बीज महंगा होता जा रहा है। सरकार बीज कंपनियों को टैक्स में भारी छूट भी देती है।
  • ट्रैक्टर्स - इन्होंने ट्रैक्टर बेचकर कमाया किसानों से 5300 करोड़: देश में ट्रैक्टर बनाने वाली प्रमुख तीन कंपनियों की वर्ष 2016-17 में कुल आय करीब 5300 करोड़ रुपए रही। इससे पहले के वर्ष में यह करीब 4500 करोड़ रुपए थी। कंपनियों की आय करीब 17 फीसदी बढ़ी। देश में हर माह 50 लाख ट्रैक्टर बिक रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद किसानों को प्रति ट्रैैक्टर करीब 30 हजार रुपए और चुकाने पड़ सकते हैं।
  • कोल्ड स्टोरेज - देश में 7200, सरकार से भारी सब्सिडी भी मिल रही: वर्ष 2016-17 में करीब 3.5 करोड़ मीट्रिक टन क्षमता के कोल्ड स्टोर बन चुके थे। इनकी संख्या 7,200 थी। एनसीसीडी के वर्ष 2015 के अध्ययन के मुताबिक करीब 75 फीसदी कोल्ड स्टोरेज का ही उपयोग हो रहा है। सरकार इस उद्योग में 15 अरब डॉलर निवेश कर रही है ताकि देश में कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़े। इससे मालिकों को फायदा होगा। 

और इधर किसानों की हालत ऐसी है:
  • 3.18 लाख किसानों ने वर्ष 1995 से 2015 के बीच खुदकुशी की। यानी औसतन हर साल 15,926 किसान। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक।
  • 27.3 करोड़ टन अनाज की पैदावार वर्ष 2016-17 में होने का अनुमान है। यह अभी तक का सर्वाधिक है। लेकिन इस बार कीमतें बीते चार साल के सबसे निचले स्तर पर हैं।
  • 3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ होगा अगर सभी राज्य सरकारें किसानों का कर्ज माफ करें तो। मैरिल लिंच के अनुसार यह जीडीपी के 2 फीसदी के बराबर है। 
  • 6426 रुपए है किसान परिवार की औसत आय। एनएसएसओ के अनुसार मासिक खर्च 6223 रुपए हैं। इसलिए कृषि जरूरतों के लिए वो कर्ज पर ही निर्भर रहता है। 

Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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