हरियाणा रोडवेज बसों में सफर करने वाले 13 लाख यात्री मंगलवार को फिर परेशान हुए। निजी परमिट रद्द करने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार रात 12 बजे से प्रदेशभर में चक्का जाम कर दिया। इससे
परिवहन व्यवस्था चरमरा गई। इस पर शाम को कर्मचारियों की आठों यूनियन के साथ परिवहन मंत्री ने बैठक की। सरकार के तीन दिन में नई पॉलिसी बनाने के आश्वासन पर मंगलवार शाम साढ़े सात बजे कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह धनखड़ के मुताबिक रात 12 बजे से ही बेड़े की 4250 बसें डिपो में खड़ी कर दी गई थीं। सिरसा, जींद, फतेहाबाद, रेवाड़ी, अम्बाला समेत कई जिलों में प्राइवेट बसों को भी डिपो में नहीं घुसने दिया गया। परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि बैठक में सहमति बन गई है। तीन दिन के अंदर नई परिवहन नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। इसमें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के सुझाव भी शामिल किए जाएंगे।
2 माह में दूसरी बार हड़ताल: इस साल प्रदेश स्तर पर दूसरी बार चक्का जाम हुआ है। इससे पहले 10 अप्रैल को भी रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। इसके बाद से जिला स्तर पर अलग-अलग जगह 5 बार चक्का जाम हो चुका है। इससे जहां आम आदमी को भारी परेशानी आती है, वहीं सरकार भी इससे खासी परेशान है।
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साभार: भास्कर समाचार
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