Sunday, June 11, 2017

मैनेजमेंट: विवाद से बचना चाहते हैं तो बदलें खुद को 'ऐसे'

कुछ लोगों का स्वभाव ऐसा होता है कि वे विवाद से बचने की कोशिश करते हैं। कुछ लोगों को परिवर्तन से डर लगता है। क्या ये लोग खुद को बदल सकते हैं। अगर हां तो कैसे? जानते हैं हार्वर्डबिजनेस रिव्यू से। साथ ही क्या बिजनेस और खेल में तुलना की जाना चाहिए। 
विवाद से डर लगता है ऐसे बदल सकते हैं खुद कोदो तरह के लोग होते हैं। एक वे जो विवाद टालना चाहते हैं
और दूसरे वो जो विवाद पसंद करते हैं। विवाद टालने वाले असहमति से बचने की कोशिश करते हैं। वे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण साथियों से सामंजस्य और संबंधों को मानते हैं। इसलिए विवाद को टालते हैं, जबकि विवाद चाहने वाले इसकी तलाश में रहते हैं। हो सकता है उन्हें अपनी बात रखने या सच की सबसे ज्यादा चिंता हो।  यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। दोनों ही मामलों में एकतरफा सोच ठीक नहीं है। यह दोनों तरीके पुराने अनुभव पर आधारित हो सकते हैं। लेकिन इन्हें बदला जा सकता है। इसके लिए पहले यह जानना होगा कि आप किस स्टाइल के हैं। क्योंकि अपनी स्वाभाविक आदत को ही जानकर इसमें बदलाव संभव है। हालांकि शुरू में इसमें हिचक होगी, लेकिन शुरुआत करना ही तरीका है। (स्रोत:एचबीआर गाइड टू डीलिंग विथ कॉनफ्लिक्ट। एमी गालो।) 
जिनमें डर है वे काम भी किए जा सकते हैं: जब नई परिस्थिति सामने आती है तो क्षमता पर संदेह हो सकता है। लेकिन कई बार लोग जितना खुद को समझते हैं उससे ज्यादा सक्षम होते हैं। अगर कोई ऐसा काम करना है जो डरा रहा है तो उन कामों के बारे में सोचिए जो अापने पहले किए हैं और जिनके लिए बहुत हिम्मत की जरूरत थी। हो सकता है ये नए जॉब पर जाने की बात हो या नए शहर में जाने की। अगर किसी नेटवर्किंग इवेंट में जाना हो और घबराहट हो तो उन लोगों के बारे में सोचिए, जिन्हें आप जानते हैं। विचार कीजिए क्या आप अपने बॉस से उसी तरह बात करते हैं, जिस तरह किसी सहकर्मी से। क्या अपने इन-लॉज़ से भी उसी तरह बात करते हैं जैसे दोस्तों से बात करते हैं। अगर जवाब हां है तो आपको ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर जवाब ना है तो आपका सामना नई परिस्थिति से हुआ है। उसके लिए पूरी तैयारी करना होगी। (स्रोत:यू आर मोर रिजिलयंट देन यू गिव योरसेल्फ क्रेडिफ फॉर। एंडी मॉलिनस्काय)
खेल और बिजनेस में तुलना ठीक नहीं: कई लीडर्स अपने कर्मचारियों को मोटिवेट करने के लिए अपने फेवरेट खेल की शब्दावली का उपयोग करते हैं। लेकिन तथ्य यह है कि बिजनेस में खेल की उपमा देना खतरनाक है। क्यों? पहला तो यह कि फुटबॉल और बास्केटबॉल में इतना उत्साह इसलिए पैदा होता है कि हर गेम और सेशन में सिर्फ एक ही विजेता होता है। बिजनेस में हर इंडस्ट्री के पास जीतने के लिए अलग-अलग अवसर होते हैं। कंपनियों का उद्देश्य कस्टमर को जीतना ज्यादा होता है, प्रतिस्पर्धी को हराना कम। दूसरा खेल में टीमवर्क खिलाड़ियों के बीच कम समय के लिए होता है, क्योंकि उनके कॉन्ट्रेक्ट भी सीमित होते हैं और कॅरिअर भी छोटा होता है। जबकि कंपनियों को लॉन्गटर्म गोल पर फोकस करना होता है। वे अपने साथ उन लोगों काे रखना पसंद करती हैं जो लंबे समय तक काम करने की इच्छा रखते हैं। 
(स्रोत:वाय स्पोर्टस आर टेरिबल मेटाफोर फॉर बिजनेस। बिल टेलर।)
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साभार: भास्कर समाचार 
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