प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नाेटबंदी का निर्णय लेकर कर्जदारों को भी लखपति दिखा दिया। नोटिस मिलने पर अब जवाब के लिए वह एडवोकेट के माध्यम से बचाव के लिए रास्ता ढूंढने में लगे हैं। एडवोकेट के पास भी बचाव
के बहुत तरीके हैं और किसी के जवाब में चार पशु बेचकर चार लाख रुपए एडजस्ट करवा रहे हैं तो कहीं पर एग्रीकल्चर लैंड के लेन देन में 7 से 8 लाख रुपए की एडजस्ट कर रहे हैं। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। बिजनेस को बंद करके 40 लाख रुपए की रकम रखने के बहाने आने लगे हैं। किसी ने जवाब में लिखा है कि वह 30 साल से कैश में ही विश्वास रखते हैं। पूरा लेनदेन कैश में करते हैं। अपने चार साल के बेटे के लिए 10 लाख की एफडी करवाई दिखाई है और किसी ने तीन साल की बेटी की 21 साल में शादी करने के लिए 22-22 लाख रुपए जमा किए हैं। ताकि उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता सताए। इस तरह के जवाब देकर वह आयकर विभाग के टैक्स और जुर्माने से बचने की जुगत में लगे हैं। इस तरह के जवाब किसी एक केस में नहीं है, बल्कि दर्जनों केस में इस तरह के जवाब एडवोकेट बनाने में लगे हैं। 8 नवंबर 16 से दिसंबर 2016 में नोटबंदी में 500 और 1000 रुपए के जमा की गई राशि खुलकर बाहर आई। कैश में विश्वास रखने वाले लोगों को कोई रास्ता िदखाई नहीं दिया तो बैंक की तरफ रुख किया और उनकी जमा पूंजी आॅन रिकॉर्ड गई। इस राशि पर आज तक टैक्स जमा हुआ और ही खातों से लेनदेन हुआ।
करनाल आयकर विभाग के प्रमुख पीएस तोमर का कहना है कि विभाग ने जमाकर्ताओं से नकदी के स्रोत के बारे में पूछा गया है। वैध जवाब को 'स्वीकृत' माना जाएगा और आगे सत्यापन नहीं होगा। जिन मामलों में तय अवधि में जवाब नहीं मिला है, आंकलन अधिकारी अपनी राय बना सकता है कि सत्यापन के दायरे में आए व्यक्ति के पास जमा की गई नकदी के बारे में कोई स्वीकार्य जवाब नहीं है। एेसे मामलों को स्वीकार्य नहीं मानकर आगे कार्रवाई के लिए प्रक्रिया के तहत लाया जाएगा।
दादा के 30 साल पुराने लोन को भी जमा किया: एडवोकेट के पास पहुंची एक फाइल में उल्लेख है कि नोटबंदी का असर इतना हुआ कि किसी ने 30 साल पुराने दादा के कर्ज को चुकता कर दिया तो किसी ने अपना लोन क्लियर किया। बहुतों ने एडवांस क्रेडिट में भी जमा कर दिए। एक ही व्यक्ति के अलग-अलग अकाउंट्स में कुल राशि 60 से 80 लाख रुपए की ट्रांजेक्शन मिली तो आयकर विभाग ने नोटिस जारी करने शुरू कर दिए।
इन लोगों से मांगे जवाब : 'आपरेशनऑफ क्लीन मनी' के तहत आयकर विभाग ने एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने 30 दिसंबर को समाप्त नोटबंदी की अवधि के दौरान खातों में संदिग्ध रूप से पांच लाख रुपए से अधिक राशि जमा की है।
जमा के साथ खर्च राशि का भी दे रहे ब्यौरा: एडवोकेट संजय मदान का कहना है कि आयकर विभाग ने जमा राशि का नोटिस दिया हुआ है। जवाब में खर्च राशि के अलावा उसके आय का स्त्रोत का उल्लेख है। कई केस ऐसे आए हैं कि उन्होंने सारी उम्र पशुओं के व्यापार में निकाल दी। अक्सर ऐसे व्यापार में कैश चलता है। कम पढ़े लिखे हैं। इसलिए बैंक से लेन देन नहीं करते। नोटबंदी के दौरान लोगों ने अपने-अपने अलग अकाउंट्स में पैसे जमा कराते गए। जबकि इन सभी खातों में उपभोक्ता का पैन नंबर रजिस्टर्ड है। इसलिए पैन नंबर से उसकी पूरी ट्रांजेक्शन क्लियर हो रही है।
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साभार: भास्कर समाचार
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