पांच प्रतिशत एसबीसी आरक्षण तीन बार हाईकोर्ट द्वारा खत्म किए जाने के बाद भी राज्य सरकार चौथी बार एसबीसी आरक्षण का विधेयक लाने जा रही है। इसके ड्राफ्ट का प्रारूप 16 जून को मंत्रीमंडलीय उप समिति के
तीन मंत्री मिलकर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के साथ होने वाली प्रस्तावित बैठक में रखेंगे। हालांकि इस मामले में गुर्जर नेताओं ने शुक्रवार को सचिवालय में हुई मंत्रीमंडलीय उपसमिति की बैठक में चेताया कि 50 प्रतिशत के अंदर ही आरक्षण का ड्राफ्ट तैयार कराएं क्योंकि तीन बार राज्य सरकार ने आरक्षण दिया और कोर्ट खत्म करता रहा है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। उधर, राज्य सरकार के मंत्री भी गुर्जर नेताअों को इस बात पर मनाने में लगे है कि इस बार भी 50 प्रतिशत के बाहर ही आरक्षण देना संभव है और इस बार कोई कमी नहीं रहेगी। बैठक में राज्य सरकार की तरफ से मंत्रियों में राजेंद्र राठौड़, अरूण चतुर्वेदी हेमसिंह भड़ाना, आरक्षण समिति की तरफ से गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, हिम्मत सिंह, एडवोकेट शेलेंद्र सिंह, कैप्टन हरप्रसाद, भूराभगत सहित 15 लोग मौजूद रहे। गुर्जर अारक्षण संघर्ष समिति के नेताओं ने दावा किया है कि पुरानी भर्तियों में एसबीसी की जातियों को ओबीसी का फायदा दिलाने पर सहमति बनी है। ओबीसी की वरीयता का फायदा अभ्यर्थियों को दिलाया जाएगा। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर दी जा रही 1252 पदों में से 118 भर्तियां ऐसी है, जिसमें एसबीसी 1 प्रतिशत और शेष ओबीसी लागू था। ऐसे में इन पदों पर वरीयता के आधार पर नियुक्ति देने पर सरकार राजी हुई है।
9 साल में तीन बार आया एसबीसी: एसबीसी आरक्षण 2008 में आया और फिर स्टे हुआ। एसबीसी की अधिसूचना 30 नवंबर 2012 को निकली 5 प्रतिशत मिला वो 29 जनवरी 2013 को स्टे हुआ। फिर उसके उसके बाद 16 अक्टूबर 2015 को 5 प्रतिशत आरक्षण मिला, जो 14 महीने चला और 9 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इस मामले पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में है।
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साभार: भास्कर समाचार
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