नई प्राइवेट परिवहन नीति समेत अन्य मांगों पर सरकार और हरियाणा रोडवेज की 8 यूनियनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। प्रदेश में मंगलवार से किसी भी रूट पर हरियाणा रोडवेज की सामान्य और वॉल्वो बसें नहीं
चलेंगी। यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना होगा। कर्मचारी यूनियनों ने रविवार को पानीपत में बैठक कर मांगों के संबंध में सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी मियाद सोमवार शाम खत्म हो गई। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे बार-बार समझौता करने के बावजूद परिवहन विभाग के अफसर प्राइवेट ऑपरेटरों को अनुचित फायदा देने के लिए पिछले दरवाजे से नई परिवहन नीति को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। हरियाणा इंटक यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता नसीब जाखड़ ने बताया कि नई परिवहन नीति रद्द करने के लिए सरकार कर्मचारियों को कई बार भरोसा दिला चुकी है, बल्कि हाईकोर्ट में शपथ-पत्र तक दे चुकी है। वहीं, सीएम के मीडिया सलाहकार अमित आर्य का कहना है कि यूनियन से प्रशासन की बातचीत जारी है। उम्मीद है मंगलवार सुबह तक कोई हल निकल आएगा। इसके बावजूद अफसरों ने अम्बाला और हिसार में जबरन निजी बसें चलवाने की कोशिश की। जबकि 4 जून को हरियाणा निवास पर विभागीय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि जीपीएस सिस्टम समेत तमाम मापदंड पूरे नहीं करने तक निजी बसें नहीं चलेंगी। 8 यूनियनों के सामूहिक फैसले के तहत आज से रोडवेज के करीब 20 हजार कर्मचारी 4,000 बसों को नहीं चलने देंगे। बता दें कि तीन दिन से अम्बाला डिपो की 185 बसें नहीं चल रही हैं। अम्बाला से चंडीगढ़, हिसार बैलेट, दिल्ली, कटरा और अन्य जगहों पर जाने के लिए यात्रियों को बस नहीं मिल रही है। रोडवेज डिपो को भी रोजाना लाखों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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साभार: भास्कर समाचार
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