Saturday, June 17, 2017

24 साल बाद मुंबई हमलों के मामले में अबू सलेम और पांच अन्य दोषी करार

देश में हुए पहले बड़े आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को विशेष टाडा अदालत ने छह और आरोपियों को दोषी करार दिया। यह हमला बाबरी ढांचा ढहाए जाने के बाद 12 मार्च, 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार 12 विस्फोट
करके किया गया था। इसमें 257 लोग मारे गए थे और 713 घायल हुए थे। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच दक्षिण मुंबई स्थित विशेष टाडा अदालत ने दाऊद के भरोसेमंद साथी रहे मुस्तफा दोसा उर्फ मुस्तफा मजनूं और अबू सलेम सहित छह आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषी करार दिए गए अन्य आरोपी हैं- रियाज सिद्दीकी, ताहिर मचेर्ंट, करीमुल्ला खान और फिरोज खान। जबकि, माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के दुबई स्थित कार्यालय में प्रबंधक रहे कयूम शेख के विरुद्ध पर्याप्त सुबूत नहीं होने को कारण उसे बरी कर दिया गया। सभी दोषियों की सजा पर 19 जून से बहस शुरू होगी और अगले सप्ताह ही इनकी सजा पर फैसला हो जाने की संभावना है। 
सरकारी वकील दीपक साल्वी के अनुसार, ये सातों आरोपी 1995 में शुरू हुए पहले चरण के मुकदमे के समय देश से भागे हुए थे। 2003 से 2010 के बीच इनकी गिरफ्तारी हो सकी, इसलिए सातों के लिए विशेष टाडा अदालत में अलग से मुकदमा चलाना पड़ा। छह आरोपियों को टाडा अदालत के विशेष जज गोविंद सनप ने धारा 120 (बी) अर्थात आपराधिक साजिश का दोषी पाया है। दीपक साल्वी के अनुसार, वह सभी आरोपियों के लिए अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड की मांग करेंगे।  
प्रथम चरण के मुकदमे में हुई थी याकूब को फांसी: 12 मार्च, 1993 के सिलसिलेवार विस्फोटों के मामले का पहला मुकदमा 1995 में शुरू होकर 2006 तक चला। इसमें 1213 आरोपियों पर मुकदमा चला। जिनमें 100 आरोपी दोषी पाए गए थे। तब के विशेष टाडा जज पीडी कोदे ने 100 में से 12 दोषियों को मृत्युदंड एवं 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड पाए 11 दोषियों की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। जबकि एक दोषी याकूब मेमन को जुलाई 2015 में फांसी दी जा चुकी है। इस मामले में 33 आरोपी अभी भी भगोड़े हैं। इनमें प्रमुख हैं- दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, मोहम्मद दोसा एवं अनीस इब्राहिम।
जेल में होती थी गैंगवार: मुंबई की आर्थर रोड जेल में अबू सलेम और मुस्तफा दोसा की गैंगवार चर्चित रही है। जेल में आमना-सामना होने पर दोनों एक-दूसरे को गालियां देते थे। 2010 में दोसा ने अबू सलेम पर एक धारदार चम्मच से हमला भी किया था। उसके बाद यह टकराव टालने के लिए सलेम को ठाणो की तलोजा जेल भेज दिया गया था। दोनों गैंगस्टरों के बीच इस अनबन का कारण सलेम का दाऊद से गद्दारी करना रहा है।
दाऊद ने नहीं की थी सलेम की मदद: मुस्तफा मुंबई विस्फोटों के पहले से दाऊद का साथी रहा है। जबकि, अबू सलेम तब अपराध की दुनिया में बहुत छोटा माना जाता था। विस्फोटों के बाद सलेम मुंबई से भागकर पहले कुछ दिन लखनऊ में रहा। फिर अपने एक दोस्त की मदद से दुबई पहुंच गया। इस दौरान दाऊद ने उसकी खास मदद नहीं की। संभवत: इसी से चिढ़कर सलेम ने दाऊद गिरोह से किनारा कर लिया।
  1. मुस्तफा दोसा: सातों आरोपियों में प्रमुख मुस्तफा दोसा उक्त आतंकी हमले की तैयारियों के लिए दुबई में हुई पहली बैठक में उपस्थित था। यह बैठक उसके बड़े भाई मोहम्मद दोसा के दुबई स्थित घर में हुई थी, जिसमें दाऊद, टाइगर मेमन सहित कई लोग मौजूद थे। मुस्तफा इस बैठक सहित विस्फोट करवाने के लिए हुईं कुल 15 बैठकों में शामिल रहा। आतंकी हमले के लिए हथियार एवं विस्फोटक मुंबई भेजने का काम भी मुस्तफा ने ही किया था। पहली खेप उसी ने मुंबई के निकट दीघी बंदरगाह पर भिजवाई थी। फिर तीसरी खेप में एके-56 राइफलें भी गुजरात के रास्ते मुंबई उसी ने भिजवाई थीं।
  2. अबू सलेम: मुस्तफा दोसा द्वारा भेजी गई तीसरी खेप के हथियार गुजरात के भरूच जिले से मारुति वैन में अबू सलेम लेकर आया था। टाडा अदालत ने सलेम को भी आतंकी हमले का मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए दोषी करार दिया है। उसे हत्या का भी दोषी माना गया है। सलेम यह दलील देकर बचने की कोशिश कर रहा था कि उसे पहली बार भरूच से लाए गए हथियारों की जानकारी तब हुई, जब हथियारों से भरा लकड़ी का बक्सा अभिनेता संजय दत्त के घर पर खोला गया। अबू सलेम बिल्डर प्रदीप जैन हत्याकांड में पहले से 25 वर्ष की सजा काट रहा है। यह सजा भी उसे जज गोविंद सनप ने ही सुनाई थी। सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित करके लाया गया था। प्रत्यर्पण संधि के अनुसार उसे मृत्युदंड या 25 वर्ष से अधिक की सजा नहीं दी जा सकती। संभवत: इसीलिए सलेम अदालत में अन्य आरोपियों की तुलना में ज्यादा निश्चिंत दिखाई दे रहा था।
  3. ताहिर मर्चेंट: बम विस्फोटों की साजिश के लिए दुबई में हुई बैठकों में रहा। पाक में हथियारों की ट्रेनिंग के लिए अपने सहयोगियों के जरिये मुंबई में लोगों को तैयार किया। हथियार हासिल करने को धन का इंतजाम किया।
  4. रियाज सिद्दीकी: नौ एके-56 राइफलों, 100 हैंड ग्रेनेड और मैगजीन के बक्सों को भरूच से मुंबई लाने के लिए वैन का इंतजाम किया। इस वैन में इस तरह के बदलाव किए गए थे कि इन हथियारों को खुफिया तरीके से उसमें छुपाया जा सके।
  5. फिरोज खान: मुंबई में विस्फोटों से दो महीने पहले मोहम्मद दोसा (मुस्तफा दोसा का भगोड़ा भाई) ने 8 जनवरी, 1993 को फिरोज अब्दुल राशिद खान और एक अन्य आरोपी को कस्टम अधिकारियों व लैंडिंग एजेंट्स को हथियारों और विस्फोटकों की खेप पहुंचने की बाबत जानकारी देने के लिए भेजा। यह खेप अगले दिन पहुंचनी थी। वह विस्फोट की साजिश के लिए हुई बैठकों में भी शामिल था।
  6. करीमुल्ला खान: विस्फोटों की साजिश के लिए हुई बैठकों में शामिल था। महाराष्ट्र के शिखंडी में हथियारों की खेप उतरवाने में उसने सक्रिय भूमिका अदा की थी।

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साभार: जागरण समाचार 
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