मरीजों के लिए भगवान माने जाने वाले डॉक्टर हरियाणा सरकार की सेवाओं में टिके रहने को तैयार नहीं हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के वेतनमान में अंतर तो इसका बड़ा कारण है ही, उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में भी अधिक लुभावने पैकेज मिल रहे हैं। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद एक साल में 52 डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं से नाता तोड़ चुके हैं। प्रदेश सरकार की सेवाओं में डॉक्टरों का
भरोसा इसलिए भी नहीं टिक पा रहा कि पूरी सर्विस में उन्हें सिर्फ एक ही प्रमोशन मिल पाती है। मेडिकल आफिसर (एमओ) से सीनियर मेडिकल आफिसर (एसएमओ) तक प्रमोट होने में ही डॉक्टरों का पूरा सर्विस काल खत्म हो जाता है। 15 से 35 साल की सेवाएं देने वाले डॉक्टर हों या फिर सिविल सर्जन, सभी का एक ही स्केल प्रमोशन है, जबकि स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को सरकार न केवल बेहतरीन पैकेज देने को तैयार रहती है, बल्कि उनके लिए पदोन्नतियों के तमाम अवसर खुले हैं। हरियाणा में डॉक्टरों का पे-स्केल पंजाब व दिल्ली के मुकाबले बेहद कम है। पंजाब में टेलीफोन व कन्वेंस भत्ताें के अलावा अच्छा वेतनमान मिलता है। एनआरएचएम में डॉक्टरों को 80 हजार से 1.25 लाख तक वेतनमान मिलता है। मेवात के लिए यह राशि 1.50 लाख तक पहुंच जाती है, लेकिन सामान्य डॉक्टरों को मात्र 45 हजार के वेतनमान में काम चलाना पड़ रहा है। पहले से कार्यरत डॉक्टर इसलिए भी नौकरी छोड़कर जा रहे हैं, क्योंकि उनके लिए कांट्रैक्ट पर अधिक वेतनमान मिलने की संभावनाएं हैं। सरकार ने डॉक्टरों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 761 नई भर्तियां करने का फैसला लिया है। इनमें 389 को ज्वाइनिंग लैटर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक सभी ने ज्वाइनिंग नहीं की है। नए डॉक्टर भी सिर्फ प्लेटफार्म के रूप में सरकारी नौकरी का इस्तेमाल करते हैं और मौका मिलते ही प्राइवेट अस्पतालों में चले जाते हैं। विधानसभा में यह मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। तब सरकार ने जानकारी दी कि पिछले एक साल में 27 डॉक्टर सरकारी सेवाओं से त्यागपत्र दे चुके और 25 डॉक्टर स्वेच्छा से गैर हाजिर चल रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों का अच्छा सेटअप और आकर्षक वेतनमान सहित बेहतरीन सुविधाएं सरकार ने उनके नौकरी छोड़ने की अहम वजह मानीं।
भरोसा इसलिए भी नहीं टिक पा रहा कि पूरी सर्विस में उन्हें सिर्फ एक ही प्रमोशन मिल पाती है। मेडिकल आफिसर (एमओ) से सीनियर मेडिकल आफिसर (एसएमओ) तक प्रमोट होने में ही डॉक्टरों का पूरा सर्विस काल खत्म हो जाता है। 15 से 35 साल की सेवाएं देने वाले डॉक्टर हों या फिर सिविल सर्जन, सभी का एक ही स्केल प्रमोशन है, जबकि स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को सरकार न केवल बेहतरीन पैकेज देने को तैयार रहती है, बल्कि उनके लिए पदोन्नतियों के तमाम अवसर खुले हैं। हरियाणा में डॉक्टरों का पे-स्केल पंजाब व दिल्ली के मुकाबले बेहद कम है। पंजाब में टेलीफोन व कन्वेंस भत्ताें के अलावा अच्छा वेतनमान मिलता है। एनआरएचएम में डॉक्टरों को 80 हजार से 1.25 लाख तक वेतनमान मिलता है। मेवात के लिए यह राशि 1.50 लाख तक पहुंच जाती है, लेकिन सामान्य डॉक्टरों को मात्र 45 हजार के वेतनमान में काम चलाना पड़ रहा है। पहले से कार्यरत डॉक्टर इसलिए भी नौकरी छोड़कर जा रहे हैं, क्योंकि उनके लिए कांट्रैक्ट पर अधिक वेतनमान मिलने की संभावनाएं हैं। सरकार ने डॉक्टरों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 761 नई भर्तियां करने का फैसला लिया है। इनमें 389 को ज्वाइनिंग लैटर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक सभी ने ज्वाइनिंग नहीं की है। नए डॉक्टर भी सिर्फ प्लेटफार्म के रूप में सरकारी नौकरी का इस्तेमाल करते हैं और मौका मिलते ही प्राइवेट अस्पतालों में चले जाते हैं। विधानसभा में यह मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। तब सरकार ने जानकारी दी कि पिछले एक साल में 27 डॉक्टर सरकारी सेवाओं से त्यागपत्र दे चुके और 25 डॉक्टर स्वेच्छा से गैर हाजिर चल रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों का अच्छा सेटअप और आकर्षक वेतनमान सहित बेहतरीन सुविधाएं सरकार ने उनके नौकरी छोड़ने की अहम वजह मानीं।
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साभार: जागरण समाचार
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