हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निशाने पर इस बार संस्कृत का
विरोध करने वाले नेता हैं जो उनकी नजर में देशद्रोही हैं। विज लंबे समय से
संस्कृत को देश के पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल कराने की
जद्दोजहद कर रहे हैं। अपनी ही सरकार के समक्ष भी वे कई बार इसे उठा चुके
हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। विज को यही नागवार गुजर रहा है। विज का
कहना है कि देश में बड़े से बड़े नेता अपने घर सुख-दुख में
पंडित को बुला
संस्कृत के श्लोक पढ़ा कर ही कार्य संपन्न कराते हैं। देश के पाठ्यक्रम में
संस्कृत को शामिल न होने देने वाले नेता देशद्रोही हैं। संस्कृत हमारी
जननी है और इसे षड्यंत्र के तहत भारत से दूर रखा गया। संस्कृत को पूरे देश
में छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को अनिवार्य विषय के तौर पर
पढ़ाया जाना चाहिए। संस्कृत का ज्ञान न होने से युवा देश व दुनिया में
उन्नति नहीं कर सकेंगे। चिकित्सा शिक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक
अनुसंधानों की बारीक जानकारी भी संस्कृत ग्रंथों में मिलती है। विज का कहना
है कि आज पूरी दुनिया आयुर्वेद में विश्वास कर रही है। इसे समझने के लिए
भी संस्कृत पढ़ने की आवश्यकता है। विज हिन्दू रीति रिवाज से लिए गए फेरों
और वर-वधू द्वारा संस्कृत के श्लोकों के बाद हां के जवाब को खाली शपथ पत्र
पर अंगूठा लगाने जैसा मानते हैं क्योंकि संस्कृत में पढ़े जाने वाले
श्लोकों की नव दंपति को जानकारी ही नहीं होती।
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साभार: जागरण समाचार
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