Saturday, April 29, 2017

बुद्धि को दिखावे की जरूरत नहीं होती, खुद दिखती है

एन. रघुरामन (मैनेजमेंट गुरु)
शुक्रवार सुबह मैंने दूधवाला फ्लाइट पकड़ी। यह उदयपुर जाने वाली पहली फ्लाइट है। दूधवाला फ्लाइट इसलिए कि मुझे 2:30 पर उठना पड़ता है और 3:30 पर घर से निकलना होता है। 4:10 पर बोर्डिंग बस में चढ़ना होता है, क्योंकि एयरक्राफ्ट मुंबई एयरपोर्ट में काफी दूर खड़ा रहता है। बस को प्लेन तक पहुंचने में 25 मिनट का समय
लगता है। किसी के लिए भी अपने सहयात्री को पहचानने का पर्याप्त समय होता है। खास तौर पर उन लोगों को जो 'क्या आप जानते हैं मैं कौन हूं' के अंदाज में दिखावा करने में लगे होते हैं। तब तक अखबार नहीं आता, इसलिए स्वघोषित इंटेलिजेंट लोगों को सुनना ही पड़ता है। वह अपनी महिला सहकर्मी को उन करोड़ों की डील के बारे बता रहा था जो उसने अपने जीवन में सेलेब्रिटी, फिल्म निर्माताओं और जाने-माने उद्योगपतियों के साथ की थी। बस में सवार सभी लोग उस समय उनींदे से थे, उसकी उपलब्धियों के बारे में सुन रहे थे। उस ऊंची आवाज को सिर्फ एक ही आत्मा धिक्कार रही थी- एक तीन साल की लड़की जो अपने पिता के कंधे पर सिर रखकर सो रही थी। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। बस में उसने अपनी खूबसूरत सहकर्मी युवती के सामने अपनी होशियारी का दावा किया कि कैसे उसने इकोनॉमी सीट बुक की है, लेकिन उसे बिज़नेस क्लास का अनुभव दिलाएगा। उसने इमरजेंसी रो की विंडो सीट और गलियारे की सीट अपने लिए ब्लॉक की थी, क्योंकि अधिकतर कोई भी इमरजेंसी रो में बीच की सीट नहीं लेना चाहता। यह खाली रह जाती हैं, इससे इन दो यात्रियों को बिज़नेस क्लास की फीलिंग होती है। लेकिन मिडिल सीट पर मुझे देखकर वह निराश हुआ और उसने मुझसे अनुरोध किया कि मैं विंडो की तरफ शिफ्ट हो जाऊं। उसने मुझे लॉलीपॉप दिया कि मैं शांति से सो सकूंगा। मैंने कहा कि क्या आपको पता है कि इमरजेंसी रो में विंडो सीट के यात्री को टेकऑफ और लैंडिंग के समय सोने की इजाजत नहीं होती और क्रू मेंबर्स एविएशन रूल्स के अनुसार आपको जगा सकते हैं? उसने मेरी बात पर तब तक भरोसा नहीं किया जब तक कि यही बात कैबिन क्रू ने उसे बता नहीं दी। 
फिर बातचीत उसके प्रिय विषय बॉलीवुड की ओर मुड़ गई। मैंने उससे पूछा कि मुझे पक्का पता है कि आप जानते ही होंगे कि फिल्म 'ताल' इंश्योरेंस बिज़नेस के लिए कितनी महत्वपूर्ण रही है? वह ब्लैंक हो गया। मैंने बताया कि यह पहली भारतीय फिल्म थी, जिसका बीमा किया गया था। उसे लगा कि मैं फिल्म इंडस्ट्री से हूं और वह खुद को एक्सपोज नहीं होने देना चाहता था, खास तौर पर उसके सामने जिसके लिए वह शोऑफ कर रहा था। उसने अपनी बातों को करेंसी और डिमॉनिटाइजेशन की ओर मोड़ दिया। मैंने मजाक में ही उससे पूछ लिया कि बताइए वह कौन-सा देश है, जहां सिक्के नहीं होते, सिर्फ पेपर करेंसी ही चलती है और चेकबुक तो 1997 में ही इंट्रोड्यूस हुई है? एक्जीक्यूटिव का चेहरा लाल पड़ गया। जब मैंने कहा वियतनाम तो उनके चेहरों पर जो भाव व्यक्त हुए उन्हें मैं यहां जाहिर नहीं करना चाहता। इसके बाद कई बैंकिंग संबंधी मामलों पर बातचीत होती रही- जैसे 2000 रुपए का नोट 17 भाषाओं में जारी हुआ है। कर्नाटक ऐसा राज्य है, जहां बैंकिंग की हर नई चीज परखी जाती है। बीएसई सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज है, जिसकी ट्रेड स्पीड 6 माइक्रोसेकंड है। बैंक ऑफ बड़ोदा एक मात्र ऐसा बैंक है जो तिरुपति में लड्‌डू सप्लाई जैसी अजीब सर्विस देता है। हम उदयपुर में उतरे, जिसने एक रियल इंटेलिजेंट बनाया है, 17 साल के कल्पित वीरवाल ने जईई मेन्स की परीक्षा में 100 पर्सेन्टाइल हासिल करने वाला देश का पहला शख्स बना है। मुझे लगा मेरे सह-यात्रियों जैसे लोगों को कल्पित से कुछ सीखना चाहिए। 

फंडा यह है कि अगरआप में असली बुद्धिमत्ता है तो लोग आपको पहचान लेंगे, इसके लिए दिखावे की कोई जरूरत नहीं है। 
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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