Monday, June 8, 2015

उच्चतर शिक्षा विभाग ने ट्रांसजेंडर को नहीं दिया स्थान

सामाजिक उपेक्षा के शिकार ट्रांसजेंडर को उच्चतर शिक्षा विभाग ने भी नकार दिया है। विभाग द्वारा प्रदेश के तमाम सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए मांगे गए आवेदन में इनके लिए कोई विकल्प नहीं दिया गया है। वहीं महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) ने अपने कैंपस में ट्रांसजेंडर को दाखिले का मौका दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता देकर सभी शिक्षण संस्थानों को उन्हें दाखिला देने को
कहा था। इसके लिए फॉर्म में जेंडर दर्शाने के लिए अलग से कॉलम देने को कहा था। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को भी इस बाबत आदेश जारी किया था। इसके बावजूद उच्चतर शिक्षा विभाग ने इस सत्र में दाखिले के लिए मांगे आवेदन में ट्रांसजेंडर कोे जगह नहीं दी। ऐसे में वे आवेदन करने से चूक सकते हैं। ऑनलाइन फॉर्म में जेंडर की श्रेणी में ट्रांसजेंडर को स्थान नहीं दिया गया है। अभी तक ट्रांसजेंडर छात्रों को दाखिला नहीं मिलता था। न ही इनके लिए अलग से कोई व्यवस्था थी। सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी के आदेश के बाद ट्रांसजेंडर के लिए सामान्य छात्रों के साथ पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ था, लेकिन उच्चतर शिक्षा विभाग ने आदेश को दरकिनार कर उन्हें कहीं स्थान नहीं दिया। ऐसे में वे उच्च शिक्षा लेकर अपना करियर कैसे संवारेंगे, इस बारे में विभाग के पास भी जवाब नहीं है। यूजीसी के आदेश के मुताबिक ट्रांसजेंडर छात्रों को विशेष पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा जाएगा। आरक्षित वर्ग को जो सुविधाएं, छात्रवृत्ति हॉस्टल आदि दी जाती हैं, सभी मिलेगी। ट्रांसजेंडर की सुरक्षा की गारंटी भी संस्थान को लेनी है, ताकि कोई इन छात्रों से अभद्रता न करे।

सबसे पहले आईटीआई ने दिया था स्थान: हरियाणा में सबसे पहले आईटीआई ने अपने यहां दाखिले में ट्रांसजेंडर को प्राथमिकता दी थी। उसने सभी कोर्स में आवेदन की छूट दी थी। आईटीआई अगली बार से निकलने वाली भर्ती में भी इन्हें मौका देने पर विचार कर रहा है। 
साभार: अमर उजाला समाचार
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