Tuesday, May 9, 2017

मैनेजमेंट: स्थानीय मुद्‌दों पर लड़ने वाले योद्धाओं को सहयोग दें

एन. रघुरामन (मैनेजमेंट गुरु)
प्रभाशंकर राय अपनी मौजूदा जिम्मेदारी छोड़ना चाहते हैं। जीवन में कुछ और करना चाहते हैं, इसलिए रविवार को पूरे दिन आसपास के सभी लोग उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे कि प्लीज़ मत जाइए। रविवार को सुबह
उनकी पॉश लोकेलिटी के सैकड़ों लोग मिले और प्लान पर विचार किया कि कैसे उन्हें रोका जाए। तो ये प्रभाशंकर राय हैं कौन और उन्होंने किया क्या है? यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। 2011 में राय बेंगलुरू की चिन्नाप्पनाहल्ली झील के पीछे एक पॉश कॉलोनी में रहने आए थे। उनसे कहा गया था कि जो फ्लैट वे खरीदना चाहते हैं उसके सामने कॉन्क्रीट के जंगल के बीच प्राकृतिक इकोसिस्टम और इंकोलॉजी है। उन्हें यह भी बताया गया था कि झील में जैव विविधता है। बत्तख, हंस, बाज जैसे जीव देखे जा सकते हैं। कई पक्षियों के अलावा झील में मछलियां भी बहुत है। सांपों की कई प्रजातियां हैं, पानी के सांप भी शामिल है, जिनका पक्षी शिकार करते हैं। जब वे यहां पहुंचे तो पता चला कि यह तो झील का इतिहास है। उन्हें लगा कि इसे गंदगी, कचरा, आदि से होने वाली आसन्न मौत से बचाने की जरूरत है। 
प्रशासन की और से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसे फिर संवारने का फैसला किया गया। कृषि पृष्ठभूमि वाले राय गुलबर्गा से 25 कामगारों लाए। दो महीने उन्होंने झील को और गहरा करने, सफाई करने का काम किया। फिर कॉर्पोरेट्स से संबंधों के जरिये स्पॉन्सर जुटाए और रोकथाम वाले पत्थरों पर पेंटिंग की (यूनाइटेड वे), 21 सोलर लैम्प लगाए( सिमेंस ने डोनेट किए), डेढ़ लाख रुपए के औजार ( जनरल मोटर्स ने एक लाख रुपए दिए) लिए। इसके अलावा अपने पास से भी पैसा लगाया और दोस्तों से भी सहयोग लिया। वे अपनी कार में रखकर 2500 पौधे झील तक ले गए। लोगों को काम में लगाकर इन्हें रोपा और भूला दी गई इस झील को बचाया। सीनियर सिटीजन एरिया, बच्चों के पार्क, वॉक-वे, तारबंदी, ग्रेनाइट की 32 बेंच लगाने और गेट लगाने जैसे कई काम यहां अपनी देखरेख में करवाए। चूंकि वे फिशरीज टैक्नोलॉजिस्ट भी रहे हैं, इसलिए झील की गंदगी (जो तटीय परिस्थतिकी के लिए के घातक थी) के बारे में एक रिपोर्ट मत्स्य विभाग को सौंपी, ताकि वहां जारी फीशिंग को रोका जा सके। 
जल्द ही झील को 'सिटी टूरिज्म' में शामिल किया गया और यह वैसी ही हो गई जैसा उन्हें यहां आने से पहले बताया गया था। बाद में भरोसा कायम हुआ और 24 अप्रैल 2013 को नगर प्रशासन ने एक एमओयू साइन किया। इस एमओयू में कहा गया कि सिविक बॉडी झील को 24 घंटे सुरक्षा मुहैया कराएगी और इसके आसपास के लोग फुटपाथ, स्ट्रक्चर, मूर्ति विसर्जन, टॉयलेट्स के लिए पानी मुहैया कराने, सिक्यूरिटी केबिन और जनरल लाइटनिंग जैसे अन्य मामले देखेंगे। जिम्मेदारियों की घाषणा के इस क्लासिक केस में अन्य सिविक बॉडीज की ही तरह बेंगलुरू प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा और बार-बार के अनुरोधों के बावजूद ध्यान नहीं दिया और धीरे-धीरे झील अपनी खूबसूरती खो बैठी। जब राय ने इसमें अन्य लोगों की अरुचि देखी तो उन्होंने शनिवार को ट्रस्ट छोड़ देने का फैसला किया। यह खबर जंगल में आग की तरह फैली। लोग चाहते हैं कि वे एक्टिव रहें और उन्होंने सड़क पर साइन बोर्ड लगा दिए कि प्लीज डोंट गो, बेंगलोर निड्स थाउज़ेड्स लाइक यू। हालांकि राय का क्या फैसला है, अभी पता नहीं चला है। 

फंडा यह है कि यदि आप स्थानीय योद्धाओं को सहयोग नहीं देंगे, उनके काम में मदद नहीं करेंगे तो भविष्य में आपके लिए कौन लड़ेगा? 
Post published at www.nareshjangra.blogspot.com
साभार: भास्कर समाचार 
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