Sunday, January 8, 2017

गुस्सा आपकी कमजोरी भी हो सकती है और ताकत भी

ब्रूस ली ने कहा है कि गुस्सा एक पल में किसी को भी मूर्ख साबित कर सकता है। कुछ लोगों की आदत बात-बात पर गुस्सा करने की होती है। लेकिन क्या गुस्से पर काबू पाना संभव है। यह पोस्ट आप नरेशजाँगङा डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम के सौजन्य से पढ़ रहे हैं। 
  1. इसका एक तरीका है खुद से सवाल किया जाए कि मुझे गुस्सा कब और क्यों आता है। निश्चित ही आपको पता होगा कि किन परिस्थितियों ने आपको गुस्सा दिलाया। अगला सवाल होना चाहिए कि गुस्सा मुझ पर इतना हावी कैसे हो गया। कहीं ऐसा तो नहीं किसी डर, किसी हार, किसी छोटी-सी भूल ने गुस्सा दिलाया हो। अक्सर तो गुस्सा आता है, जब मन चाहा काम नहीं हो रहा हो। असल में सभी को कभी कभी इस स्थिति से गुजरना ही पड़ता है। गलतियां स्वीकारने, जिम्मेदारियां कबूल करने की भावना इस पर नियंत्रण ला सकती है। 
  2. गुस्से का कारण जानने भर से गुस्से पर काबू नहीं पाया जा सकता है। क्योंकि कई लोगों के लिए गुस्सा बहुत ताकतवर प्रेरणा और मोटिवेशन भी होता है। गुस्सा और एक दिशा पा जाए तो यह लाभदायक भी हो सकता है। इसी दिशा में सोचना चाहिए। ऐसा कर पाएं तो यह समस्याओं के समाधान में मददगार भी होगा। इस तरह अपने गुस्से को पॉजिटिव और क्रिएटिव दिशा दी जा सकती है। 
  3. गुस्सा यूनिवर्सल भावना है। सभी में होता है। लेकिन जब कहीं एक जैसे गुस्से वाले लोग एकसाथ जमा हो जाएं तो वहां एक अलग ही स्थिति बन सकती है। इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि एक जैसे लोग जब एक ही गोल के बारे में सोचते हैं तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। अगर वे एक टीम के रूप में काम करना शुरू कर दें तो वे अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी ताकतवर हो सकते हैंै। हालांकि गुस्सा अगर अनियंत्रित हो तो सेल्फ डिस्ट्रक्टिव हो सकता है। बुद्ध ने इस बारे में कहा है कि आपको गुस्से के लिए दंडित नहीं किया जाता, बल्कि गुस्सा ही आपको दंडित करता है।

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साभार: भास्कर समाचार 
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